By रेनू तिवारी | Sep 29, 2026
हाथों की मेहंदी का रंग अभी पूरी तरह छूटा भी नहीं था, आँखों में बुने अनगिनत सपनों की रोशनी अभी धुंधली भी नहीं पड़ी थी कि दहेज के भूखे दरिंदों ने एक हंसती-खेलती मासूम जिंदगी को घुट-घुट कर मरने पर मजबूर कर दिया। शादी के महज चार महीने- सिर्फ 120 दिन- और उस दर्द का खौफनाक अंत एक बंद कमरे में छत से लटकती लाश के रूप में हुआ। 24 साल की मासूम IT इंजीनियर वैष्णवी गिसरे ने जब अपने ही घर के पंखे से गले में फंदा लगाया होगा, तो उस एक पल में उसके बाप की जिंदगी भर की कमाई, उसकी लाड-प्यार से पाली गई बेटी का वजूद और एक हंसते-खेलते परिवार की सारी खुशियां एक झटके में उजड़ गईं। 45 लाख रुपये का भव्य मंडप और 10 तोले सोने की चमक भी उन दहेज लोभियों की हवस की आग को बुझा न सकी, और आखिरकार लालच की इस बेदर्दी बलि में एक और पढ़ी-लिखी बेटी की सांसें हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो गईं। मृतका की पहचान वैष्णवी ओंकार गिसरे (24) के रूप में हुई है, जो पुणे के वडाचीवाड़ी इलाके की एक पॉश रेजिडेंशियल सोसाइटी में अपने पति के साथ रह रही थी।
मृतक महिला की पहचान वैष्णवी ओंकार गिसरे के तौर पर हुई है, जो पुणे के वडाचीवाड़ी इलाके की एक रेजिडेंशियल सोसाइटी में अपने पति के साथ रहती थी। उसकी मौत के बाद, पुरंदर तालुका के रहने वाले उसके पिता प्रवीण रघुनाथ जरंडे (51) ने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के अनुसार, वैष्णवी की शादी इस साल 9 मई को ओंकार संजय गिसरे (28) से हुई थी। उसके परिवार का दावा है कि उन्होंने शादी में लगभग 45 लाख रुपये खर्च किए और तोहफ़े के तौर पर 10 तोला सोना दिया।
लेकिन परिवार का आरोप है कि शादी के बाद हालात बदल गए। शिकायत में कहा गया है कि वैष्णवी से बार-बार कहा जाता था कि वह कार खरीदने में मदद के लिए अपने माता-पिता से 5 लाख रुपये लाए। उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि इस मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से भी परेशान किया जाता था।
पुलिस ने बताया कि वैष्णवी ने गुरुवार रात अपने घर पर छत के पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। पिता की शिकायत के बाद, पुलिस ने उसके पति, ससुर संजय महादेव गिसरे (49) और सास रूपाली संजय गिसरे (42) के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। उन पर दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। आगे की जांच चल रही है।
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