By अंकित सिंह | Oct 15, 2026
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत तेज है। इस बीत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि पहले दिन से ही हमने इस मामले में हर संभव कोशिश की है और सभी जरूरी कानूनी कदम उठाए हैं। परिवार से बातचीत के बाद, जिसमें उनकी CBI जांच की मांग भी शामिल थी, हमने ऐसी जांच कराने के लिए आगे और प्रयास किए। हमारे स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी से की गई कार्रवाई के कारण ही हाई कोर्ट ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कानूनी प्रक्रिया चल रही है, और इस तरह के अपराध के लिए हमारी 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति है। यह साफ है कि कांग्रेस पार्टी के पास कोई ठोस मुद्दा या एजेंडा नहीं है, इसलिए वे बार-बार इस मामले का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अंकिता के माता-पिता की मांग थी कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पूरी होने तक भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि वह और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा एक दिन पहले अंकिता के माता-पिता से मिले थे। गांधी ने आरोप लगाया कि जिस जांच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की और सवाल पूछने वाले मां-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने सरकार पर पीड़ितों की आवाज दबाने और सवाल उठाने वालों को हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी। कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी—जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।’’ पुलिस ने अंकिता के माता पिता और कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।