BRICS Summit के लिए Putin आएंगे India, Modi जाएँगे Russia, दोनों पक्के दोस्त मिलकर बदलेंगे वैश्विक समीकरण!

By नीरज कुमार दुबे | Apr 16, 2026

भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत और रूस के संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस वर्ष सितंबर में भारत आने की प्रबल संभावना है। यदि यह दौरा होता है तो यह नौ महीनों के भीतर उनका दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले वह दिसम्बर 2025 में वार्षिक भारत रूस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए थे। 

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देखा जाये तो पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, विशेषकर अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के टकराव ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों को प्रभावित किया है। हम आपको यह भी बता दें कि हाल ही में भारत और रूस के बीच विदेश कार्यालय स्तर की बातचीत भी हुई थी जिसमें दोनों देशों ने अपने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की थी। इस बातचीत में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया और आने वाले उच्चस्तरीय दौरों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई।

दूसरी ओर, ऊर्जा क्षेत्र में भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह रूस और ईरान से तेल खरीदने के लिए दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा। इससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। पहले इस छूट के कारण भारतीय रिफाइनर सस्ते दाम पर रूसी तेल खरीद पा रहे थे, लेकिन अब आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। बताया गया है कि अस्थायी छूट के दौरान भारतीय कंपनियों ने लगभग तीन करोड़ बैरल रूसी तेल का ऑर्डर दिया था।

वैसे भारत और रूस के संबंध केवल ऊर्जा या रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक और बहुआयामी साझेदारी है। हाल ही में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दोनों देशों के विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों ने द्विपक्षीय संबंधों के नए एजेंडा पर चर्चा की थी। इस दौरान वैश्विक आर्थिक बदलाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहे थे। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी मित्रता समानता, आपसी विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है। भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की नीति को रूस ने विशेष महत्व दिया है। यही कारण है कि भारत की वैश्विक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है और उसे एक उभरती हुई महाशक्ति के रूप में देखा जा रहा है।

आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग साठ अरब डॉलर तक पहुंच गया और लक्ष्य है कि इसे 2030 तक सौ अरब डॉलर तक बढ़ाया जाए। इसके लिए परिवहन, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्र में नए प्रयास किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारा और उत्तरी समुद्री मार्ग जैसे प्रकल्प इस दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। 

इसके अलावा दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन और जी 20 जैसे मंचों पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। वैश्विक व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण और संतुलित बनाने के लिए भारत और रूस समान दृष्टिकोण साझा करते हैं। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के पालन पर जोर देते हैं।

हम आपको यह भी बता दें कि आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस दौरे की भी संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद और मजबूत होगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि पुतिन का संभावित भारत दौरा और मोदी की प्रस्तावित रूस यात्रा इस साझेदारी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बहरहाल, वर्तमान वैश्विक तनाव और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत और रूस अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस सहयोग को नई गति देने का एक अहम अवसर साबित हो सकता है, जहां वैश्विक मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करने की कोशिश होगी। इस प्रकार भारत रूस संबंध न केवल द्विपक्षीय स्तर पर बल्कि वैश्विक मंच पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

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