अहोई अष्टमी पर राधा कुंड स्नान से मिलता है संतान सुख

By प्रज्ञा पाण्डेय | Oct 28, 2021

हिन्दू धर्म में अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड में स्नान करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है, तो आइए हम आपको राधा कुंड स्नान का धार्मिक महत्व तथा विधि के बारे में बताते हैं।

अहोई अष्टमी पर राधा कुंड स्नान में स्नान का खास महत्व है। निःसंतान दम्पत्ति जो गर्भधारण की समस्या से ग्रसित होते हैं उन्हें राधा कुंड में स्नान कर राधाकृष्ण का आर्शीवाद लेने से उन्हें विशेष लाभ प्राप्त होता है। यह कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाया जाता है। मध्यरात्रि में यहां स्नान करने का विशेष महत्व होता है। राधा कुंड में स्नान के बाद भक्त गोवर्धन जी की परिक्रमा करते हैं।

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, यह माना जाता है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले अहोई अष्टमी के दिन अगर कोई निसंतान दंपत्ति सच्चे मन से राधा रानी की पूजा करके कुंड में स्नान करता है तो राधा रानी उस दंपति की झोली संतान से भर देती हैं। इस दिन संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति निर्जला व्रत रखते हैं। 

स्नान का ऐतिहासिक महत्व 

यह परंपरा हमारे हिन्दू धर्म में द्वापर युग से चली आ रही है और यह माना जाता है कि राधा कुंड इतना चमत्कारी है कि सच्ची श्रद्धा रखने वालों से राधा रानी प्रसन्न रहती हैं और उनको सुंदर और स्वस्थ संतान प्रदान करती हैं। परंपरा के अनुसार, जिस दंपत्ति की इच्छा पूरी हो जाती है वह अपनी संतान के साथ वापस इस कुंड में स्नान करने और भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा करने जरूर आते हैं। इस कुंड की लोकप्रियता सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी है। ऐसा कहा जाता है कि दुनिया के किसी भी कोने से अगर मन में सच्ची भावना रखकर कोई दंपत्ति इस कुंड में स्नान करने आता है तो उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। 

जानें राधा कुंड के बारे में 

राधा कुंड मथुरा नगरी से करीब 26 किलोमीटर दूर गोवर्धन परिक्रमा के दौरान पड़ता हैं। मान्यता है कि इस रात्रि में अगर पति और पत्नी संतान प्राप्ति की कामना के साथ इस राधा कुंड में डुबकी लगाएं और अहोई अष्टमी का निर्जल व्रत रखें, तो उनके घर में जल्द ही किलकारियां गूंजती हैं इसके अलावा जिन दंपति को यहां स्नान के बाद संतान प्राप्ति हो जाती हैं वे भी इस दिन अपनी संतान के साथ यहां राधा रानी की शरण में हाजरी लगाने आते हैं और इस कुंड में स्नान करते हैं माना जाता हैं कि राधा कुंड में अहोई अष्टमी के दिन स्नान की ये परंपरा द्वापरयुग से चली आ रही हैं।

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अहोई अष्टमी के दिन ही हुई थी राधाकुंड की स्थापना

माना जाता है कि राधाकुंड की स्थापना द्वापरयुग में अहोई अष्टमी के दिन ही हुई थी. भगवान श्रीकृष्ण ने इस कुंड में रात करीब 12 बजे स्नान किया था इसलिए आज भी यहां अहोई अष्टमी की मध्य रात्रि में ही विशेष स्नान होता हैं हर साल देश विदेश से आए लाखों भक्त यहां कुंड के तट पर स्थित अहोई माता के मंदिर में पूजा करते हैं और आरती कर कुंड में दीपदान करते हैं।

सत्य निष्ठा से करें स्नान 

अगर आप भी संतान प्राप्ति के लिए राधा कुंड में स्नान करना चाहते हैं तो आपको यह विधि जरूर पता होनी चाहिए। इस पूजा की शुरुआत अहोई अष्टमी की रात को श्री राधा कुंड के पास दीया जला कर राधा रानी को याद करने से होती है। राधा रानी की पूजा करके उनको प्रणाम करें फिर अपनी इच्छा राधा रानी के सामने रखकर प्रार्थना करें। याद रहे आपके अंदर राधा रानी के लिए सच्ची भावना होनी चाहिए। यह सब करके आप ठीक 12 बजे अपने साथी के साथ राधा कुंड में स्नान करें और स्नान करने के बाद सीताफल दान करें।

- प्रज्ञा पाण्डेय

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