प्रियंका गांधी के स्वागत में लगे पोस्टरों से राहुल गांधी ‘नदारद’

By अजय कुमार | Jul 16, 2021

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ माह का ही समय शेष बचा हैं। 14 मार्च 2022 से पहले नई विधानसभा का गठन होना है। चुनाव को लेकर भाजपा-कांग्रेस-सपा-बसपा सहित तमाम छोटे-छोटे दल भी ताल ठोंक रहे हैं। अब यह तो समय ही बताएगा कि कौन बाजी मारेगा,लेकिन आज जो हालात हैं उसके हिसाब से भारतीय जनता पार्टी काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, तो एम-वाई(मुस्लिम-यादव) के सहारे समाजवादी पार्टी को भी लगता है कि वह ही मिशन-2022 को भेदने में कामयाब रहेगें। बसपा भी दलितों के सहारे बाजी मारना चाहती है। बसपा सुप्रीमों को लगता है कि उनके पास दलितों का 22 प्रतिशत वोट है। इसमें यदि मुस्लिम वोटों का भी ‘तड़का’ लग जाए तो बसपा के लिए सत्ता की सीढ़िया चढ़ना कोई अजूबा नहीं होगा। मुसलमान बसपा के साथ क्यों आएगा इस पर बसपाई बड़ी साफगोई से कहते हैं कि हम ही बीजेपी को चुनौती दे सकते हैं। समाजवादी पार्टी तो 7-8 प्रतिशत यादव वोटों के सहारे है,मुसलमान इतने बेवकूफ नहीं है कि वह 7-8 प्रतिशत के जनाधार वाली समाजवादी पार्टी के साथ खड़ा होकर अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारेगा,जबकि उसके पास 22 प्रतिशत दलित वोट बैंक वाली बसपा मौजूद है। दलित-मुसलमान एक जुट हो गए तो भाजपा की शिकस्त आसान हो जाएगी।

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प्रशांत किशोर के बारे में खबरें आ रही हैं कि वह जल्द ही कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें कांग्रेस 2024 के लोकसभा और उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य में अगले वर्ष होने वाले विधान सभा चुनाव की जिम्मेदारी भी सौंप सकती है। सोनिया-राहुल सहित प्रियंका वाड्रा को लगता है कि प्रशांत के सहारे वह यूपी में अपनी खोई हुई साख पुनः प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन यह इतना आसान नहीं है।यह नहीं भुलना चाहिए 2017 के विधान सभा चुनावों में कांग्रेस के लिए बनाई गई प्रशांत किशोर की रणनीति अमलीजामा नहीं पहन पाई थी। तब कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव में उतरने का फैसला चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कहने पर ही लिया था। उन्होंने ही नारा दिया था-’यूपी के लड़के’ और “यूपी को ये साथ पसंद है।’ हालांकि ये गठबंधन चुनाव जीतना तो दूर चारों खाने चित हो गया था।

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बाद में कहा जाने लगा कि प्रशांत किशोर की रणनीति को कांग्रेस ने पूरी तरह से अमली जाना पहनाया होता तो हालात कुछ और होते, क्योंकि प्रशांत चाहते थे कि 2017 के विधान सभा चुनावों में चेहरा प्रियंका हों और ऐसा नहीं हुआ था,यह और बात है 2017 में जिस प्रियंका को लेकर प्रशांत किशोर विश्वास से भरे हुए थे,वही प्रियंका वाड्रा 2019 के लोकसभा चुनाव में कुछ भी नहीं कर पाई थीं  2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस ने प्रियंका को आगे करके ही लड़ा था,मगर न कांग्रेस की सीटे बढ़ पाईं, न वोट प्रतिशत ही बढ़ा था, बल्कि कम ही हो गया था। बात प्रियंका गांधी की कि जाए तो यूपी चुनावों को लेकर वह खासी एक्टिव हो चुकी हैं। आज ही प्रियंका ने यूपी के कांग्रेस नेताओं के साथ एक अहम बैठक की है। इस बीच प्रशांत किशोर के कांग्रेस के साथ जुड़ने की अटकलों के बीच यह भी कहा जाने लगा है कि यूपी चुनाव में प्रशांत किशोर का रोल बड़ा हो सकता है और यह भी संभव है कि इसे ध्यान में रखते हुए ही कांग्रेस अपना गेम प्लान तैयार कर रही हो।

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वैसे कहा यह भी जा रहा है कि कांग्रेस ने अब तक सौ से ज्यादा सीटों पर टिकट के लिए दावेदारों को हरी झंडी दी है। इनमें से काफी सीटों पर एक से अधिक दावेदारों को क्षेत्र में जाकर तैयारी करने के लिए कहा गया है। तीन महीने की समीक्षा में जो दावेदार खरा उतरेंगे, उनका टिकट फाइनल कर दिया जाएगा। कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने प्रत्येक विस सीट के लिए जिला व महानगर इकाइयों से तीन दावेदारों का पैनल मांगा है। पूर्वांचल के आजमगढ़, मिर्जापुर, वाराणसी, बस्ती और गोरखपुर आदि मंडलों की सीटों पर दावेदारों के पैनल मिल चुके हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इनमें से 142 दावेदारों से प्रदेश नेतृत्व वार्ता कर चुका है।  तय किया गया है कि जो दावेदार तीन महीने के भीतर क्षेत्र में अपनी गतिविधियों से दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगा, उसका टिकट फाइनल होगा। इसके लिए तय अवधि में स्थानीय मुद्दों पर जनांदोलन, बैठकें, गोष्ठियां और सचिव स्तर के पदाधिकारियों के क्षेत्र में कार्यक्रम के आधार पर मूल्यांकन होगा।

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