IDBI Bank stake sale: राहुल गांधी ने लगाया बेचने का आरोप, वित्त मंत्री का पलटवार

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 30, 2026

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक में बड़ी हिस्सेदारी बेचने के फैसले का विरोध करते हुए शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों के साथ खड़े होने का ऐलान किया और कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक राष्ट्र निर्माण के साधन हैं, बेचने की संपत्ति नहीं। राहुल के आरोपों पर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर अपने शासनकाल में बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर राजनीतिक दबाव डालने का आरोप लगाया तथा कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पेशेवर प्रबंधन, विवेकपूर्ण बैंकिंग और 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के पुनर्पूंजीकरण के जरिये आईडीबीआई बैंक को फिर मजबूत बनाया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के नाम लिखे एक पत्र को ‘एक्स’ पर साझा किया और बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

मोदी के समय में बिकते हैं। मैं आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं।’’ गांधी ने पत्र में कहा कि पिछले साल मार्च में आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के एक समूह ने संसद भवन में उनसे मुलाकात की थी और सवाल किया था कि सरकार उस बैंक को क्यों बेच रही है जिसे कर्मचारियों ने मुनाफे में पहुंचाया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा लोकसभा में उठाया और सरकार से पूछा कि एक लाभ कमाने वाले सार्वजनिक बैंक को क्यों बेचा जा रहा है तथा उसके कर्मचारियों एवं जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी।

उन्होंने दावा किया कि सरकार ने इसका कोई कारण नहीं बताया और अब उसने आईडीबीआई बैंक को कनाडा की कंपनी ‘फेयरफैक्स’ को बेचने का फैसला किया है। गांधी के मुताबिक, आईडीबीआई की शुरुआत एक अग्रणी विकास बैंक के रूप में हुई थी और वाणिज्यिक बैंक बनने तक का उसका सफर ‘‘कठिन’’ रहा है। उन्होंने कहा कि सात साल पहले आईडीबीआई बैंक घाटे में था, जबकि पिछले साल उसने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा कमाया।

गांधी ने बैंक कर्मचारियों से कहा, ‘‘यह बदलाव आपकी मेहनत का नतीजा है।’’ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सार्वजनिक धन से बनाया गया संस्थान जनता का होता है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की बैंक में कुल 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो बिक्री के बाद घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी। गांधी ने कहा कि 2003 में सरकार ने संसद को आश्वासन दिया था कि आईडीबीआई में उसकी हिस्सेदारी हमेशा कम से कम 51 प्रतिशत रहेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘यह वादा भले ही कानून में दर्ज न हो, लेकिन संसद से किया गया वादा भारत की जनता से किया गया वादा है।’’ कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि आईडीबीआई के निजी स्वामित्व में जाने के बाद अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण समाप्त हो जाएगा तथा कर्मचारियों की सेवा शर्तों को मिलने वाला संरक्षण भी प्रभावित होगा। गांधी ने कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बेचने की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण के साधन हैं।’’ उन्होंने कर्मचारियों से एकजुट और दृढ़ रहने का आह्वान किया। राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में बैंकों और वित्तीय संस्थानों का इस्तेमाल निजी संस्थाओं की तरह किया तथा बैंक कर्मचारियों पर विवेकपूर्ण ऋण मानदंडों को दरकिनार कर कर्ज देने का दबाव बनाया।

सीतारमण ने अपने आरोपों के समर्थन में 1957 के हरिदास मूंदड़ा प्रकरण का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1976 में तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकने पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के तत्कालीन चेयरमैन आर. के. तलवार को पद से हटा दिया था। सीतारमण ने संजय गांधी से जुड़े मारुति ऋण मामले और 1980 के दशक में तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री बी. जनार्दन पुजारी की भूमिका का भी उल्लेख किया।

वित्त मंत्री ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में मंत्री रहे पवन कुमार बंसल पर भी केनरा बैंक पर उनके परिवार से जुड़े व्यवसायों को कर्ज देने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया। सीतारमण ने दावा किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार को आईडीबीआई बैंक खराब वित्तीय स्थिति में मिला था। उन्होंने आरोप लगाया कि आईडीबीआई को कांग्रेस नेताओं से करीबी संबंध रखने वाले कई बड़े कारोबारी समूहों को ऋण देने के लिए मजबूर किया गया था और इनमें से कई ऋण बाद में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में बदल गए, जिससे बैंक को भारी नुकसान हुआ।

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने पेशेवर प्रबंधन, विवेकपूर्ण नीतियों और 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के पुनर्पूंजीकरण के जरिये आईडीबीआई बैंक को पुनर्जीवित किया और बैंक अब विकास के अगले चरण के लिए तैयार है। आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन की प्रक्रिया का बचाव करते हुए सीतारमण ने कहा कि इसमें सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और सरकार इस बारे में पहले ही स्पष्टीकरण दे चुकी है। राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सीतारमण ने कहा कि राफेल को लेकर उनके आरोप भी विफल हुए थे और आईडीबीआई मामले में भी ऐसा ही होगा।

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