By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 29, 2026
रेलवे बोर्ड के एक पूर्व सदस्य सहित विशेषज्ञों तथा सेवानिवृत्त वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों ने रेलवे मंत्रालय के उस निर्देश की आलोचना की है, जिसमें आग संबंधी सुरक्षा के मद्देनजर रेलवे के सभी जोन को रात 11 बजे से सुबह पांच बजे के बीच मोबाइल फोन और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट बंद करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके बजाय रेलवे मंत्रालय को ‘फ्यूज’ या ‘सर्किट ब्रेकर’ लगाने के निर्देश देने चाहिए, ताकि सर्किट में अत्यधिक करंट प्रवाहित होने पर बिजली की आपूर्ति अपने आप बंद हो जाए। रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य (इंजीनियरिंग) सुबोध जैन ने कहा, ‘‘आग लगने की घटनाएं सॉकेट, इलेक्ट्रिकल सर्किट या वायरिंग में खराबी के कारण होती हैं, न कि खुद मोबाइल फोन चार्ज करने से।
उन्होंने सुझाव दिया कि जब भी करंट अचानक बढ़े, तो फ्यूज को बिजली आपूर्ति काट देनी चाहिए। उन्होंने रेलवे सुरक्षा आयुक्त की उस हालिया रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें नवंबर 2023 में नयी दिल्ली-दरभंगा हमसफर क्लोन स्पेशल ट्रेन के शयनयान में लगी आग की घटना की जांच की गई थी। विशेषज्ञ ने बताया कि रिपोर्ट की सिफारिशों में से एक यह थी कि सभी डिब्बों में पर्याप्त क्षमता वाले फ्यूज लगाए जाएं।
रेलवे बोर्ड ने 26 अक्टूबर 2026 को सभी जोन को अपने 2014 के आदेश का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया, जिसके तहत आग की घटनाओं को रोकने के लिए ट्रेन की बोगियों में रात 11 बजे से सुबह पांच बजे के बीच सभी मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट बंद रखे जाने हैं।