राजस्थान संकट की वजह से गुजरात में बिगड़ ना जाए कांग्रेस का खेल! अशोक गहलोत के पास है अहम जिम्मेदारी

By अंकित सिंह | Sep 28, 2022

राजस्थान में कांग्रेस के लिए सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच वर्चस्व की लड़ाई है। मामला आलाकमान तक पहुंच गया है। राजस्थान संकट को लेकर सोनिया गांधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार सक्रिय हैं। भले ही कांग्रेस भारत जोड़ो यात्रा निकाल रही है। लेकिन पार्टी के अंदर की लड़ाई लगातार बढ़ती जा रही है। हालांकि, यह बात भी सच है कि जिस तरीके से राजस्थान में घटनाक्रम घटित हुआ, उसकी वजह से अशोक गहलोत की कांग्रेस आलाकमान पर पकड़ कमजोर हुई है। सवाल अब भी बरकरार है कि क्या अशोक गहलोत के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है? फिलहाल अशोक गहलोत का कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से नाम बाहर हो चुका है। 

 

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इस साल गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजस्थान के पड़ोसी राज्य गुजरात में कांग्रेस सत्ता वापसी के सपने देख रही है। गुजरात में चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की ओर से अशोक गहलोत को ही बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अशोक गहलोत को गुजरात का पर्यवेक्षक बनाया गया हैं, वहीं उनके बेहद करीबी रघु शर्मा प्रभारी की भूमिका निभा रहे हैं। कुल मिलाकर देखें तो अशोक गहलोत और उनके करीबी नेताओं पर ही गुजरात में चुनाव की कमान कांग्रेस ने सौंप रखी है। गुजरात में कांग्रेस के लिए पिछले 27 सालों में सत्ता वापसी संभव नहीं हुई है। हालांकि, 2017 के चुनाव में अशोक गहलोत की रणनीति की वजह से गुजरात में कांग्रेस को कुछ उम्मीद जरूर जगी थी। यही कारण है कि इस बार भी गुजरात के लिए अशोक गहलोत को ही जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

 

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राजस्थान के कई मंत्री तथा विधायक गुजरात में लगातार पिछले 2 महीनों से लगातार काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर देखें तो कांग्रेस ने गुजरात का जिम्मा पूरी तरीके से राजस्थान के नेताओं को सौंप रखी है। लेकिन जिस तरीके से हाल के दिनों में घटनाक्रम हुई है, उससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राजस्थान में कांग्रेस के लिए संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। हर रोज नई नई तरह की राजनीति सामने आ रही है। अशोक गहलोत के समर्थक विधायक के सचिन पायलट के समर्थकों पर हमलावर हैं तो वहीं दूसरी तरफ से भी पलटवार किया जा रहा है। ऐसे में राजस्थान में सुलह के बाद ही गुजरात में कांग्रेस के लिए संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं है कि अशोक गहलोत पार्टी के कद्दावर नेता हैं और साथ ही साथ रणनीतिक हिसाब से बेहद कामयाब नेता माने जाते हैं। 


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