By अंकित सिंह | Jun 27, 2026
कांग्रेस महासचिव और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अयोध्या राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी पर सवाल उठाए और 31 जनवरी, 2026 को निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। X पर एक पोस्ट में उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी गड़बड़ियाँ सिर्फ़ निचले स्तर के कर्मचारी ही कर सकते हैं और ऊँचे स्तर के लोगों की मिलीभगत की ओर इशारा किया। उन्होंने लिखा कि यह सवाल भी अहम है: क्या सिर्फ़ निचले स्तर के कर्मचारी अपने दम पर CCTV कैमरे बंद कर सकते हैं और हज़ारों करोड़ के चढ़ावे में हेराफेरी कर सकते हैं, या इसके पीछे कुछ बड़े लोगों की मिलीभगत है?
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि दान गहरी आस्था के साथ दिया जाता है और उसका गलत इस्तेमाल धार्मिक भरोसे का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। इसी पवित्र भावना के साथ लोग मंदिर में सिर झुकाते हैं और दान देते हैं। जिन लोगों ने राम मंदिर में चोरी की है, उन्होंने धर्म और आस्था की मूल भावना को ठेस पहुँचाने का सबसे बड़ा पाप किया है। उसी दिन, कथित गबन की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफ़ा दे दिया।
यह घटनाक्रम अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी से जुड़ी FIR दर्ज होने के बाद सामने आया। उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत यह मामला दर्ज किया गया। FIR में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव और अन्य लोगों के नाम शामिल थे। अयोध्या से SP के पूर्व विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया था कि 27 करोड़ रुपये से लेकर 7.5 करोड़ रुपये तक के दान में हेराफेरी की गई थी।
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