By नीरज कुमार दुबे | Jun 17, 2026
अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे से जुड़े विवादों की जांच अब तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल ने आज भी मंदिर परिसर और उससे जुड़े लोगों से पूछताछ की। इस मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी व्यापक बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल जहां इसे महाघोटाला बता रहे हैं, वहीं ट्रस्ट से जुड़े लोग आरोपों को निराधार बता रहे हैं।
इस बीच पूरे मामले में राम शंकर उर्फ टिन्नू यादव का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उन्हें चढ़ावे की रकम से जुड़े विवाद का प्रमुख चेहरा बताया जा रहा है। एसआईटी ने टिन्नू यादव समेत छह सेवादारों से पूछताछ की है। टिन्नू यादव ने मीडिया से बातचीत में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि जिस कमरे में नकदी की गिनती होती थी, उससे उनका कोई संबंध नहीं था और उसका प्रभार दूसरे लोगों के पास था।
इसके अलावा, टिन्नू यादव की पृष्ठभूमि को लेकर भी कई दावे सामने आए हैं। बताया जाता है कि वह कभी अयोध्या की गलियों में टेंपो और आटो चलाया करते थे। स्वर्गद्वार मोहल्ले के निवासी टिन्नू के पिता नया घाट पर छोटी चाय की दुकान चलाते थे। वर्ष 1994-95 के दौरान उनकी पहचान श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण से हुई और बाद में वे उनके चालक बन गए। इसी दौरान उनका संपर्क कारसेवकपुरम और वहां सक्रिय संगठनों के प्रमुख लोगों से हुआ।
बताया जाता है कि वर्ष 1998 में टिन्नू यादव की मुलाकात चंपत राय से हुई। बाद के वर्षों में उन्होंने ट्रस्ट और कारसेवकपुरम से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2019 में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज होने के बाद उन्हें ट्रस्ट के भीतर वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में शामिल किया गया। अब आरोप लग रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि हुई है। अयोध्या, लखनऊ और बस्ती जिले में मकान, छात्रावास, खेती की जमीन और कई व्यवसायों में हिस्सेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उनकी पत्नी ने आरोपों को निराधार बताया है।
उधर, इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे प्रकरण को “महापाप और महाघोटाला” बताते हुए गहन जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि चढ़ावे से शुरू हुआ मामला अब जमीन और बहुमूल्य श्रीराम शिलाओं तक पहुंच गया है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इसके पीछे कोई “सनातन विरोधी” गिरोह सक्रिय हो सकता है और इसकी गहराई से पड़ताल होनी चाहिए। उधर, भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने भी इस मामले में अपनी ताजा प्रतिक्रिया दी है।
हम आपको बता दें कि कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। सरकार का कहना है कि ट्रस्ट ने तथ्यों की निष्पक्ष जांच और राम मंदिर की छवि खराब करने के प्रयासों की सच्चाई सामने लाने की मांग की थी। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। अब सभी की नजर इस जांच पर टिकी है कि आखिर राम मंदिर से जुड़े इस बहुचर्चित विवाद की सच्चाई क्या है?