भारत मुकुट थे डॉ. लोहिया, इस मुकुट में कई भारत रत्न सुशोभित हो सकते हैं

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Oct 15, 2018

12 अक्तूबर को डॉ. राममनोहर लोहिया की 51वीं पुण्य-तिथि थी। 1967 में जब दिल्ली के विलिंगडन अस्पताल में वे बीमार थे, मैं वहां रोजाना जाया करता था। उन्हें देखने के लिए जयप्रकाश नारायण, इंदिरा गांधी, जाकिर हुसैन, मोरारजी देसाई और कौन-कौन नहीं आता था ? राजनारायणजी तो पास के एक कमरे में ही रहने लगे थे। मैं भी आखिरी तीन-चार दिन अस्पताल के सामने बने 216 और 218 नार्थ ऐवन्यू के श्री अर्जुनसिंह भदौरिया और जॉर्ज फर्नांडीस के फ्लैट में रहा था। 7 गुरुद्वारा रकाबगंज से जब 57 वर्षीय डॉ. लोहिया की शव-यात्रा निकली तो देश के सैंकड़ों राजनीतिक और बौद्धिक लोग उनके पीछे-पीछे चल रहे थे लेकिन देखिए भारत की राजनीति का दुर्भाग्य कि आज की नई पीढ़ी उनका नाम तक नहीं जानती। 

 

मैं समझता हूं कि 20वीं सदी के भारत में लोहिया से बढ़कर कोई राजनीतिक चिंतक नहीं हुआ। वे अपने आप को ‘कुजात गांधीवादी’ कहते थे और कांग्रेसियों को ‘मठी गांधीवादी’। उनके विचारों में इतनी शक्ति थी कि सिर्फ उनके दम पर उन्होंने जवाहरलाल नेहरु का दम फुला दिया था और 1967 में भारत के कई प्रांतों में गैर-कांग्रेसी सरकारें खड़ी कर दी थीं। मैंने 1961 या 62 में अपने इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में उन्हें व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया था। प्राचार्य डॉ. डेविड इतने नाराज हुए थे कि वे तीन दिन की छुट्टी पर चले गए थे। डॉ. लोहिया जहां भी जाते, वे नौजवानों को अन्याय, असमानता, अंधविश्वास और संकीर्णता के खिलाफ लड़ना सिखाते थे। उनकी सप्तक्रांति की धारणा में जात तोड़ो, अंग्रेजी हटाओ, दाम बांधो, नर-नारी समता, विश्व-सरकार, भारत-पाक एका जैसे विचार होते थे। वे गांधीजी की अहिंसा और सिविल नाफरमानी (सविनय अवज्ञा) में विश्वास करते थे। उनके विचारों से दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी भी गहरे तक प्रभावित थे।

 

दीनदयाल शोध संस्थान ने मेरे कहने पर ‘गांधी, लोहिया, दीनदयाल’ नामक पुस्तक भी प्रकाशित की थी। लोहिया के व्यक्तित्व और विचारों में इतनी प्रेरक-शक्ति थी कि मेरे-जैसे कई नौजवानों ने उस समय कई सत्याग्रहों का नेतृत्व किया और कई बार जेल काटी। वर्तमान राजनीतिक दल और नेता वैचारिक दृष्टि से अत्यंत गरीब हैं। न तो उनके पास कोई दृष्टि है न दिशा है। यदि सरकार लोहिया-साहित्य को छाप कर करोड़ों की संख्या में नौजवानों को सस्ते में उपलब्ध करवाए तो देश का बड़ा कल्याण होगा। जहां तक भारत-रत्न का सवाल है, कुछ मित्रों का आग्रह है कि वह लोहियाजी को दिया जाए। जरूर दिया जाए लेकिन मैं मानता हूं कि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व कई भारत-रत्नों से कहीं ऊंचा और बेहतर था। वे ऐसे भारत-मुकुट थे, जिसमें कई भारत-रत्नों को सुशोभित किया जा सकता है।

 

-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Bangladesh की नई BNP सरकार का शपथ ग्रहण, India-China समेत 13 देशों को भेजा न्योता

Team India का सपना, एक पारी से स्टार बने Vaibhav Sooryavanshi ने Cricket Career के लिए छोड़ी Board Exam

Asia Cup में Team India की शानदार वापसी, Pakistan को 8 विकेट से हराकर चखा पहली जीत का स्वाद

T20 World Cup 2026: Ishan Kishan के तूफान में उड़ी पाकिस्तानी टीम, भारत की धमाकेदार जीत