Ramadan 2026 । पीरियड्स में रोजा रखने पर क्या कहते हैं Islam के Rules?

By एकता | Mar 01, 2026

रमजान के दौरान इबादत का सफर जितना पुरुषों के लिए है, उतना ही महिलाओं के लिए भी है। लेकिन महिलाओं को हर महीने पीरियड्स जैसी प्राकृतिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इन दिनों में रोजा रखना चाहिए? इस्लाम ने महिलाओं की सेहत और सुविधा का खास ख्याल रखते हुए पीरियड्स के दौरान रोजा और नमाज से छूट दी है। यह कोई सजा नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ से दी गई एक राहत है ताकि शरीर पर ज्यादा बोझ न पड़े।

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सेहत का ख्याल सबसे पहले

मेडिकल नजरिए से देखें तो पीरियड्स के दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे महिलाओं को दर्द, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में पूरे दिन भूखा-प्यासा रहना सेहत को बिगाड़ सकता है। इस्लाम में इंसान की भलाई और स्वास्थ्य को हमेशा ऊपर रखा गया है, इसीलिए दुनिया का कोई भी कोना हो, मुस्लिम महिलाएं इस प्राकृतिक नियम का पालन सहजता से करती हैं।

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बिना रोजा रखे भी मिल सकता है सवाब

भले ही पीरियड्स के दिनों में नमाज और रोजा मना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिलाएं इबादत नहीं कर सकतीं। वे अल्लाह का जिक्र कर सकती हैं, दुआएं मांग सकती हैं, धार्मिक किताबें पढ़ सकती हैं और गरीबों की मदद या दान-पुण्य (सदका) कर सकती हैं। इन नेक कामों के जरिए वे पीरियड्स के दौरान भी रमजान की बरकतों और सवाब का हिस्सा बनी रह सकती हैं।

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