By नीरज कुमार दुबे | Apr 11, 2026
हिंदी फिल्म जगत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच बनते नए रिश्तों ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। ताजा घटनाक्रम में अभिनेता रणवीर सिंह का नागपुर पहुंचकर संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलना सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक और सांस्कृतिक मायने निकाले जा रहे हैं। जिस वक्त उनकी फिल्म 'धुरंधर-2 द रिवेंज' दुनिया भर में हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई कर इतिहास रच रही है, उसी समय यह मुलाकात कई सवाल भी खड़े कर रही है।
लेकिन असली तूफान तो सोशल मीडिया पर उठा। आलोचकों ने इस मुलाकात को सीधे तौर पर 'धुरंधर 2' को संघ का प्रचार करार देने की कोशिश से जोड़ दिया। कई लोगों ने इसे धन्यवाद यात्रा तक कह डाला। सवाल उठने लगे कि क्या फिल्म सिर्फ मनोरंजन है या इसके पीछे कोई वैचारिक एजेंडा भी काम कर रहा है?
इन आरोपों के बीच फिल्म निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने मोर्चा संभाला और खुलकर विरोधियों पर हमला बोला। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जो लोग सालों से प्रचार आधारित फिल्मों से कॅरियर बना रहे थे, वही अब 'धुरंधर 2' को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि सच को प्रचार बताना आज का सबसे बड़ा छल है और इस मानसिकता को खत्म करने के लिए आधे अधूरे कदम नहीं, बल्कि पूरी ताकत से जवाब देना होगा।
यह विवाद यहीं नहीं रुकता। रणवीर सिंह का यह कदम ऐसे समय में आया है जब संघ अपने सौ साल पूरे होने के मौके पर फिल्म जगत के साथ संवाद बढ़ाने में जुटा है। हाल ही में सलमान खान मुंबई में आयोजित शताब्दी समारोह में शामिल हुए थे, जहां मोहन भागवत ने युवाओं पर फिल्मी सितारों के प्रभाव की बात कही थी। करण जौहर ने भी मोहन भागवत को एक प्रभावशाली और रोचक वक्ता बताते हुए संवाद की सराहना की थी। साफ है कि संघ अब सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी पहुंच को और मजबूत करना चाहता है।
हम आपको यह भी याद दिला दें कि रणवीर सिंह पहले भी सत्ता के शीर्ष से संवाद कर चुके हैं। उन्होंने 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान यह बात कही थी कि फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि देश को जोड़ने का जरिया बन सकती हैं। 2021 में आई उनकी फिल्म तिरासी को भी उन्होंने इसी भावना से जोड़ा था, जहां देश के अलग अलग हिस्सों के लोग एक साथ आकर भारत को गौरव दिलाते हैं। अब 'धुरंधर 2' के साथ उनकी सफलता और संघ से जुड़ाव इस सोच को और मजबूत करता नजर आ रहा है।
देखा जाये तो 'धुरंधर 2' की बेमिसाल सफलता ने जहां रणवीर सिंह को शिखर पर पहुंचाया है, वहीं यह मुलाकात उन्हें विवादों के केंद्र में भी ले आई है। समर्थक इसे संवाद और सांस्कृतिक जुड़ाव की दिशा में सकारात्मक कदम बता रहे हैं, तो विरोधी इसे खतरनाक संकेत मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर सवाल उठाया जा रहा है कि क्या हिंदी सिनेमा अब खुलकर वैचारिक ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रहा है? क्या अभिनेता और फिल्मकार अब सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि विचारधारा के प्रतिनिधि बनते जा रहे हैं?
बहरहाल, यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। रणवीर सिंह, उनकी फिल्म और संघ के साथ उनका संपर्क आने वाले समय में हिंदी सिनेमा और राजनीति के रिश्तों की नई पटकथा लिख सकता है। और यही वजह है कि यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ खबर नहीं, बल्कि एक बदलते दौर की दस्तक है जिसे नजरअंदाज करना अब नामुमकिन है।