By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Mar 24, 2022
बेंगलुरु।कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि एक व्यक्ति केवल इसलिये दुष्कर्म के मुकदमे से बच नहीं सकता क्योंकि पीड़िता उसकी पत्नी है और क्योंकि यह समानता के अधिकार के खिलाफ है। अदालत ने सुझाव दिया किसांसदों को चुप्पी की आवाज पर ध्यान देना चाहिए और क़ानून में असमानताओं को दूर करना चाहिए। न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता पति के खिलाफ बलात्कार के आरोप को हटाने से इनकार करते हुए कहा सदियों पुरानी उस घिसीपिटी सोच को मिटा दिया जाना चाहिए कि पति अपनी पत्नी के शासक हैं, उनके शरीर, मन और आत्मा के मालिक है।