BRICS पेमेंट सिस्टम पर RBI का बड़ा ऐलान, क्या है CBDC का मास्टर प्लान

By अभिनय आकाश | Aug 13, 2026

क्या आपने सोचा है कि जब भारत रूस से तेल खरीदता है या ब्राजील चीन को सोयाबीन बेचता है तो बीच में डॉलर का क्या काम है? आखिर क्यों दुनिया के दो देश अपनी करेंसी होने के बावजूद एक तीसरी करेंसी यानी कि अमेरिकी डॉलर के मोहताज है। यह सवाल इसलिए क्योंकि दशकों से दुनिया इस डॉलर की दादागिरी को सहन कर रही है क्योंकि इसका कोई मजबूत विकल्प था ही नहीं। लेकिन अब खेल का मैदान बदलने वाला है। मुंबई के एक इवेंट में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक ऐसा ऐलान किया जिसने वाशिंगटन से लेकर वॉल स्ट्रीट तक के कान खड़े कर दिए हैं। जहां ब्रिक्स देश अब एक ऐसे डिजिटल ब्रिज पर काम कर रहे हैं जो डॉलर और स्विफ्ट की मोनोपोली को जड़ से उखाड़ सकता है। बिना डॉलर को छुए सीधे अपनी करेंसी में व्यापार और पलक झपकते ही पेमेंट। 

अभी क्या सिस्टम है

अभी दुनिया का अधिकांश व्यापार Swift में होता है। यानी सोसाइटी फॉर वर्ल्ड वाइड इंटर बैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन। लेकिन यह एक मैसेजिंग सिस्टम है जो बैंकों को पैसा ट्रांसफर करने की अनुमति देता है। लेकिन अब इसमें तीन बड़ी समस्याएं हैं। एक-एक करके आप समस्याओं को समझिए। इसकी पहली बड़ी समस्या है भारी फीस। क्रॉस बॉर्डर ट्रांजैक्शन पर भारी कमीशन देना पड़ता है। दूसरा पॉइंट है वक्त की बर्बादी। पैसा पहुंचने में कई घंटे या फिर कभी-कभी दिन भी लग जाते हैं। तीसरा पॉइंट है हथियार की तरह इस्तेमाल। जी हां, अगर अमेरिका किसी देश से नाराज हो जाए जैसे कि रूस से तो उसे स्फ्ट से बाहर कर देता है। यानी आपकी इकॉनमी एक झटके में ठप। ब्रिक्स यानी ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका यह देश मिलकर दुनिया की 40% से ज्यादा आबादी और ग्लोबल जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा कंट्रोल करते हैं।

प्रमुख खबरें

US China Agreement: अमेरिका से जाते, ट्रंप को ही बुरा फंसा गया जिनपिंग

Pincky Balhara ने एशियाई खेलों में कुराश स्पर्धा में कांस्य पदक जीता

ब्रिटेन में US बेस पर बड़ा हमला, 5 आतंकी गिरफ्तार, ईरान पर शक!

Sushant Singh Rajput की मौत पर फिर उठे सवाल, बहन Shweta बोलीं- शरीर पर थे कई घाव