By Ankit Jaiswal | Oct 16, 2026
विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की मजबूती लगातार छठे कारोबारी सत्र में भी जारी रही। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 94.92 के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से डॉलर की मांग कम करने के लिए उठाए गए कदमों से रुपये को सहारा मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण रुपये की बढ़त सीमित रही।
बता दें कि रुपये की कीमत पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो तेल आयात करने वाली कंपनियों को भुगतान के लिए अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव बन सकता है। इसी तरह, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं, तो वे अपनी रकम को डॉलर में बदलते हैं, जिससे रुपये की मजबूती पर असर पड़ता है।
चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी तकनीकी विश्लेषक कावेरी मोरे के मुताबिक, रुपया अब 94 के आसपास के अहम स्तर की ओर बढ़ रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर बढ़ते प्रतिफल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में ज्यादा गिरावट को रोकने और घरेलू महंगाई के असर को सीमित करने के लिए बाजार में सक्रिय कदम उठा रहा है।
कावेरी मोरे के अनुसार, 8 जून से विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए लागू किए गए विशेष उपायों के बाद रिजर्व बैंक ने बाजार में डॉलर बेचने और डॉलर-रुपये की अदला-बदली से जुड़े सौदों के जरिए करीब 75 से 80 अरब डॉलर लगाए हैं। डॉलर बेचने से बाजार में उसकी उपलब्धता बढ़ती है, जिससे रुपये पर पड़ने वाला दबाव कुछ कम हो सकता है। हालांकि, इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और निवेशकों के रुख पर भी निर्भर करता है।
आने वाले दिनों में रुपये की चाल पर रिजर्व बैंक के कदमों, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाले प्रतिफल और विदेशी निवेशकों के निवेश का असर रहेगा। यदि केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप प्रभावी रहता है, तो रुपये को स्थिरता मिल सकती है। लेकिन बाहरी दबाव लंबे समय तक बने रहने पर इसकी आगे की बढ़त सीमित हो सकती है।
इस बीच, डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.41 प्रतिशत गिरकर 101.445 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का प्रमुख मानक ब्रेंट वायदा भाव 0.34 प्रतिशत टूटकर 105.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 413.66 अंक चढ़कर 74,729.27 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 148.80 अंक की बढ़त के साथ 23,146.15 पर पहुंच गया। हालांकि, इससे एक दिन पहले विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध आधार पर 5,285.37 करोड़ रुपये की निकासी की थी। यह आंकड़ा 15 अक्टूबर का है और बाजार के आंकड़ों के मुताबिक जारी किया गया है। ऐसे में रुपये की आगे की चाल पर विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक हालात का असर बना रहने की संभावना है।