TMC में ऐतिहासिक बगावत! संसद तक पहुंची विद्रोह की आग, 20 सांसदों का दावा, क्या गिर जाएगी ममता बनर्जी की पकड़?

By रेनू तिवारी | Jun 09, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायकों के अभूतपूर्व विद्रोह के ठीक बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को अब तक का सबसे बड़ा राष्ट्रीय झटका लगा है। इस बार बगावत की गूंज सीधे देश की संसद में सुनाई दी है, जहां TMC के 28 में से 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व का साथ छोड़कर केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब सोमवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी नई दिल्ली में विपक्ष के 'INDIA' गठबंधन की बैठक में शामिल हो रहे थे।

TMC और ममता बनर्जी के लिए आगे क्या?

फिलहाल, बागी सांसद अध्यक्ष से मिलकर यह तर्क देना चाहते हैं कि काकोली घोष ही लोकसभा में TMC की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनी रहेंगी।

इसके विपरीत, दूसरे गुट का दावा है कि नेतृत्व ने घोष को इस पद से पहले ही हटा दिया था और उनकी जगह कल्याण बनर्जी को नियुक्त किया था। इस बारे में लोकसभा सचिवालय को बगावत से काफी पहले, 20 मई को एक आधिकारिक पत्र के जरिए सूचित कर दिया गया था।

पार्टी सूत्रों द्वारा साझा किए गए पत्र की एक प्रति पर अध्यक्ष कार्यालय की 29 मई की रसीद मुहर लगी थी, जिससे पता चलता है कि इसे औपचारिक रूप से जमा किया गया था।

सूत्रों ने बताया कि बागी सांसदों की योजना अध्यक्ष के सामने यह तर्क देने की है कि घोष दस्तीदार ही लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक बनी हुई हैं।

इस दावे का समर्थन पार्टी सांसद कीर्ति आजाद ने किया, जिन्होंने कहा कि पार्टी के मुख्य सचेतक के रूप में बनर्जी की नियुक्ति के बारे में पिछले महीने ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सूचित कर दिया गया था।

अगर अध्यक्ष बागी TMC सांसदों से मिलते हैं, तो यह पत्र इस बात पर विवाद का मुख्य बिंदु बन सकता है कि अधिकृत मुख्य सचेतक कौन है।

ANI से बात करते हुए काकोली घोष ने कहा कि उन्होंने इस मामले पर ओम बिरला से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि यह गुट BJP में शामिल नहीं होगा, लेकिन पश्चिम बंगाल के विकास के लिए NDA का समर्थन करेगा।

दल-बदल विरोधी कानून का समीकरण

सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस से तुरंत इस्तीफा न देने या बीजेपी में शामिल न होने का फैसला किया है। इसके बजाय, वे NDA को समर्थन देने वाले एक अलग समूह के तौर पर काम करने की योजना बना रहे हैं। इस कदम को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। संख्याओं के लिहाज से यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से अहम है।

 

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फिलहाल लोकसभा में TMC के 28 सदस्य हैं, जबकि बशीरहाट के सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद एक सीट खाली है। अगर 20 सांसद औपचारिक रूप से NDA का समर्थन करते हैं, तो यह समूह दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को आसानी से पार कर लेगा।

TMC में बंगाल का विद्रोह

यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब TMC नेतृत्व को पश्चिम बंगाल विधानसभा में बड़ा झटका लगा था। वहां पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने कथित तौर पर पार्टी आलाकमान के उस फैसले को नहीं माना, जिसमें वरिष्ठ नेता सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने की बात कही गई थी; इसके बजाय उन्होंने पार्टी से निकाले गए विधायक रिताब्रता बनर्जी को इस पद के लिए चुन लिया।

चुनाव में हार के बाद पार्टी में मची उथल-पुथल के कारण TMC प्रमुख ममता बनर्जी का रुख अब सुलह वाला नजर आ रहा है। नई दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में उन्होंने सहयोगपूर्ण रवैया अपनाया, जबकि विपक्षी दल बीजेपी के खिलाफ एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे थे।

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