मोदी सरकार का फैसला, अब 23 जनवरी से शुरू होगा गणतंत्र दिवस समारोह, सुभाष चंद्र बोस की जयंती भी शामिल

By अंकित सिंह | Jan 18, 2022

गणतंत्र दिवस के अवसर पर होने वाली झांकी हर साल आकर्षण का केंद्र रहती हैं। इनमें विभिन्न राज्यों की झांकी शामिल होती हैं। इस बार पश्चिम बंगाल की झांकी को अवसर नहीं मिल पाया है। इसी को लेकर ममता बनर्जी लगातार केंद्र सरकार पर आरोप लगा रही हैं। ममता बनर्जी ने गणतंत्र दिवस परेड से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के 125 वीं जयंती वर्ष पर उनके और आजाद हिंद फौज के योगदान से जुड़़ी पश्चिम बंगाल की झांकी को बाहर करने के केंद्र के फैसले पर हैरानी जता दी। ममता बनर्जी ने तो यह भी कह दिया कि झांकी को हटाया जाना स्वतंत्रता सेनानियों का कद घटाने और उनके महत्व को कमतर करने के समान है। दूसरी ओर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगो, इसके सांस्कृतिक विरासत और हमारे महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का यह अपमान है। 

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इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि उनकी पार्टी कभी भी देशभक्तों और प्रतीकों पर राजनीति नहीं करती। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ तकनीकी कारणों से अस्वीकार किया गया होगा। हमारी सरकार और भाजपा नेताजी के अपार योगदान के बारे में अवगत है और हम उन्हें अपने आदर्श और राष्ट्रीय नायक के रूप में देखते हैं। भाजपा कभी भी नेताजी जैसे देशभक्तों पर राजनीति नहीं करती। तृणमूल कांग्रेस इस मामले का राजनीतिकरण कर रही है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में, बनर्जी ने बोस और उनकी आजाद हिंद फौज पर आधारित राज्य की झांकी को अस्वीकार करने पर “आश्चर्य” व्यक्त किया था। झांकी में रवींद्रनाथ टैगोर, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद और श्री अरबिंदो जैसे अन्य बंगाली प्रतीक भी शामिल थे।

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