झांकी न शामिल करने के लिए केंद्र की आलोचना गलत परम्परा, संघीय ढांचे को होगा नुकसान

झांकी न शामिल करने के लिए केंद्र की आलोचना गलत परम्परा, संघीय ढांचे को होगा नुकसान

केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों को ‘फ्लैशपॉइंट’ के रूप में चित्रित करने का राज्यों के मुख्यमंत्रियों का तरीका गलत है। यह देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने में बड़ा कारक है। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों से 56 प्रस्ताव आए थे तथा उनमें से 21 का चयन किया गया है।

हर साल दिल्ली में होने वाले गणतंत्र दिवस परेड को लेकर देश के सभी राज्य अपनी अपनी झांकियों के लिए दावेदारी पेश करते हैं। इन्हीं में से कुछ राज्यों की झांकियों को मंजूरी दी जाती है जबकि कुछ को अगले साल के लिए कहा जाता है। इस साल भी कुछ ऐसा ही हुआ है। हालांकि इसको लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सहित कई राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इतना ही नहीं, इन मुख्यमंत्रियों ने केंद्र पर भेदभाव का भी आरोप लगा दिया है। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर झांकी को शामिल नहीं किए जाने को लेकर अपनी बात रखी है और साथ ही साथ यह भी बताया है कि झांकियों को चयन की प्रक्रिया बिल्कुल पारदर्शी तरीके से की जाती है। बावजूद इसके फिलहाल यह बड़ा मुद्दा बना हुआ है। 

इसे भी पढ़ें: राजनाथ सिंह ने ममता बनर्जी को लिखा पत्र, कहा- झांकियों के चयन की प्रक्रिया है पारदर्शी

अधिकारिक सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस परेड से कुछ राज्यों की झांकियों को बाहर करने को अपमान बताए जाने को लेकर अपनी राय रखी है। केंद्र ने राज्यों के भेदभाव वाले आरोप को गलत परंपरा करार दिया है। केंद्र की ओर से साफ तौर पर कहा जा रहा है कि झांकियों का चयन सरकार नहीं, बल्कि विशेषज्ञों की समिति करती है। इसके साथ ही केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के प्रस्तावों को विषय विशेषज्ञ समिति ने उचित प्रक्रिया अपनाने और विचार विमर्श के बाद पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि इसे स्पष्ट रूप से क्षेत्रीय गौरव से जोड़ा जाता है और केंद्र सरकार द्वारा राज्य के लोगों के अपमान के रूप में पेश किया गया है। यह स्क्रिप्ट लगभग हर साल चलती है जो की एक गलत परंपरा है। 

इसे भी पढ़ें: यूपी में जनाधार नहीं इसके बावजूद विपक्ष के दिग्गज नेताओं का अखिलेश ले रहे हैं साथ, जानें क्या होगा लाभ

केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे मामलों को ‘फ्लैशपॉइंट’ के रूप में चित्रित करने का राज्यों के मुख्यमंत्रियों का तरीका गलत है। यह देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने में बड़ा कारक है। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों से 56 प्रस्ताव आए थे तथा उनमें से 21 का चयन किया गया है। शायद मुख्यमंत्रियों का अपना कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है कि उन्हें साल-दर-साल गलत सूचना का इस्तेमाल करते हुए उसी पुरानी चाल का सहारा लेना पड़े। सूत्रों ने कहा कि जाहिर है मंजूर की गई झांकियों की तुलना में निरस्त किये गये झांकियों के प्रस्ताव अधिक ही होंगे। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने भी कहा कि प्रत्येक वर्ष चयन की यही प्रक्रिया अपनायी जाती है। सरकारी सूत्र ने कहा कि यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि 2016, 2017, 2019 और 2021 में उसी मोदी सरकार के तहत पश्चिम बंगाल के झांकी प्रस्तावों को उसी प्रक्रिया और प्रणाली के माध्यम से स्वीकार किया गया था।

इसे भी पढ़ें: तृणमूल कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं! ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच मनमुटाव,पोस्टर से गायब सीएम का चेहरा

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपने राज्यों की झांकियों को हटाये जाने को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करायी है। स्टालिन ने कहा कि झांकी को हटाने से तमिलनाडु के लोगों की भावनाओं और देशभक्ति की भावना को गहरी ठेस पहुंचेगी। पश्चिम बंगाल की झांकी को शामिल नहीं किए जाने पर हैरानी जताते हुए बनर्जी ने कहा कि इस तरह के कदम से उनके राज्य के लोगों को ‘तकलीफ’ होगी। केरल में भी कई राजनेताओं ने राज्य की झांकी को शामिल नहीं करने के लिए केंद्र की आलोचना की है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।