By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 22, 2026
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत विसंगतियों संबंधी नोटिस को कम करने के प्रयास के तहत वित्त मंत्रालय एक नवंबर को संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म का मसौदा परामर्श के लिए ‘एमवाईजीओवी.इन’ (माईगॉव.इन) मंच पर रखेगा। इनमें जीएसटीआर-1 भी शामिल है, जिसमें कारोबारियों को अपनी बाहरी आपूर्ति का ब्योरा देना होता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
इस परामर्श प्रक्रिया में 30 नवंबर तक टिप्पणियां दी जा सकेंगी। सीबीआईसी के जीएसटी नीति प्रभाग के आयुक्त गौरव सिंह ने कहा कि फिलहाल माल एवं सेवा कर में एक बड़ी समस्या रिटर्न (कर वापसी) के ब्योरे में विसंगति है और करीब 80 प्रतिशत नोटिस ऐसी विसंगतियों के कारण जारी किए जाते हैं। कारोबारी वर्तमान में जीएसटीआर-3बी में बदलाव या संशोधन कर सकते हैं।
यह स्व-घोषित सारांश रिटर्न और मासिक कर भुगतान फॉर्म हैं। इससे जीएसटीआर-1 के साथ ब्योरे में विसंगति पैदा होती है। सिंह ने बताया कि कारोबारी जीएसटीआर-3बी में बदलाव क्यों करते हैं।
इस बारे में उद्योग जगत से मिले जवाबों के आधार पर जीएसटी फॉर्म में बदलाव किए गए हैं और इनवॉइस प्रबंधन प्रणाली (आईएमएस) को बेहतर बनाया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘उद्योग जगत से मिले जवाबों के आधार पर हम जीएसटीआर-1 फॉर्म में बदलाव कर रहे हैं और आईएमएस को बेहतर बना रहे हैं, ताकि जीएसटीआर-3बी में संशोधन की जरूरत न पड़े। अगर इसकी जरूरत नहीं होगी, तो ब्योरे में विसंगति के आधार पर नोटिस जारी करने का कोई मामला नहीं बनेगा।
हम एक नवंबर को टिप्पणियों के लिए फॉर्म ‘एमआईजीओवी’ पर रखेंगे और इसके लिए 30 दिन का समय देंगे।’’ सिंह ने कहा कि यदि जीएसटी रिटर्न प्रणाली में सुधारों को सफलतापूर्वक लागू किया जा सका, तो आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और सटीकता से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाएंगी। यह आगे के सुधारों की नींव बनेगा। इनवॉइस प्रस्तुत करने की सुविधा (आईएफएफ), जीएसटी की तिमाही रिटर्न मासिक भुगतान (क्यूआरएमपी) योजना के तहत करदाताओं द्वारा दाखिल किया जाने वाला एक वैकल्पिक मासिक विवरण है।
जीएसटीआर-1 बिक्री का मासिक ‘इनवॉइस या बिल आधारित रिटर्न’ है, जबकि जीएसटीआर-1ए एक संशोधन विवरण है, जो करदाताओं को अपना मासिक जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल करने से पहले गलतियों को सुधारने या छूटे हुए बिलों का ब्योरा जोड़ने की अनुमति देता है। जीएसटी परिषद ने आठ अक्टूबर को जीएसटी रिटर्न में कर देनदारियों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दावों में संशोधन के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य ब्योरे में विसंगतियों को कम करना और नोटिस/सूचनाएं जारी करने की संख्या घटाना है।
परिषद ने जीएसटी फॉर्म जीएसटीआर-1/1ए/आईएफएफ में सुधारों को मंजूरी दी थी, ताकि इन फॉर्म में दिए गए ब्योरे का मासिक कर भुगतान फॉर्म जीएसटीआर-3बी में दर्ज ब्योरे के साथ बेहतर मिलान किया जा सके। परिषद ने रिटर्न में देनदारी की सही जानकारी देने और उसमें सुधार/संशोधन की व्यवस्था को भी मंजूरी दी, ताकि जीएसटीआर-3बी में दर्ज कर देनदारी, जीएसटीआर-1/1ए/आईएफएफ में दी गई देनदारी के ब्योरे के अनुरूप हो। इसके अलावा, परिषद ने जीएसटी डीआरसी-03 फॉर्म में बदलावों को मंजूरी दी।
इस फॉर्म में उन चालान का ब्योरा घोषित किया जाता है, जिनके लिए भुगतान किया गया है। परिषद ने सीजीएसटी नियम, 2017 के नियम 60 में उप-नियम (6ए) जोड़ने को मंजूरी दी। इसके तहत आईएमएस में प्राप्तकर्ता को आवक आपूर्ति से संबंधित किसी दस्तावेज को स्वीकार करने, अस्वीकार करने या लंबित रखने की अनुमति होगी।
इसका उद्देश्य जीएसटीआर-2बी फॉर्म में आईटीसी का विवरण तैयार करना है। जीएसटीआर-2बी प्रणाली द्वारा तैयार किया जाने वाला ऐसा विवरण है, जिसमें उपलब्ध कर ‘क्रेडिट’ की जानकारी होती है। परिषद ने रिटर्न में आईटीसी की सही जानकारी देने और उसमें सुधार/संशोधन की व्यवस्था को भी मंजूरी दी, ताकि जीएसटीआर-3बी में दावे वाले आईटीसी, जीएसटीआर-2बी में उपलब्ध कराए गए आईटीसी के ब्योरे के अनुरूप हो।
परिषद ने सीजीएसटी नियमों में नियम 86डी जोड़ने को भी मंजूरी दी, जिसके तहत ‘रिवर्स चार्ज’ के आधार पर चुकाए गए कर और दावे वाले आईटीसी का इलेक्ट्रॉनिक विवरण दाखिल करने का प्रावधान होगा।