By अभिनय आकाश | Jan 17, 2023
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राजनीतिक प्रस्ताव रखा, जो पार्टी में उनके बढ़ते कद का संकेत है। रिजिजू इन दिनों सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम प्रणाली में सुधार के मुद्दे पर बहुत मुखर रहे हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कानून मंत्री से राजनीतिक प्रस्ताव प्रस्तुत करवाए जाने की टाइमिंग को लेकर भी चर्चा हो रही है। रिजिजू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को ठीक उसी दिन एक पत्र लिखते हुए सुझाव दिया गया है कि सरकार के प्रतिनिधियों को कॉलेजियम प्रणाली के ज्ञापन प्रक्रिया (एमओपी) के पुनर्गठन की दिशा में एक कदम के रूप में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए कॉलेजियम में शामिल किया जाना चाहिए। रिजिजू ने बार-बार कॉलेजियम प्रणाली में तत्काल सुधार की मांग करते हुए कहा है कि लंबित मामलों की भारी संख्या के लिए मौजूदा प्रणाली जिम्मेदार है।
कोलेजियम सिस्टम पर रिजिजू
जुलाई 2021 में रिजिजू को पूर्णकालिक कैबिनेट मंत्री के रूप में 'पदोन्नत' किया गया था। जिसके बाद उन्होंने कानून और न्याय मंत्रालय का कार्यभार संभाला। वह पहले युवा मामलों और खेल के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे और इससे पहले मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में राज्य मंत्री, गृह मामलों के मंत्री थे। कानून मंत्री के रूप में रिजिजू पिछले साल से कॉलेजियम प्रणाली के आलोचक रहे हैं और इस बात पर जोर देते रहे हैं कि सरकार के पास न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार है। पिछले महीने रिजिजू ने राज्यसभा को बताया कि संवैधानिक न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सामाजिक विविधता की कमी पर केंद्र को विभिन्न स्रोतों से प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है। नवंबर में, रिज्जू ने कहा कि कॉलेजियम प्रणाली अपारदर्शी है और दावा किया कि अधिकांश न्यायाधीश भी ऐसा मानते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तब कानून मंत्री की टिप्पणियों के बारे में आपत्ति व्यक्त की थी जहां उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली की आलोचना की थी।