By अभिनय आकाश | Oct 31, 2026
दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को 3 हफ्ते का समय दिया है। यह समय गुरुग्राम के शिकोहपुर ज़मीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट के साथ दाखिल किए गए उन दस्तावेज़ों की सूची देने के लिए दिया गया है, जिन पर ED ने भरोसा नहीं किया है। ED ने इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा को आरोपी बनाया है। वह इस मामले में ज़मानत पर हैं। वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट में पेश हुए। पिछली सुनवाई पर, ED ने इस मामले में DLF की भूमिका की जांच से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा था। विशेष न्यायाधीश (CBI) शिवली बंसल ने ED को दस्तावेजों की सूची दाखिल करने के लिए समय दिया और मामले की सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तारीख तय की। ED की ओर से वरिष्ठ वकील ज़ोहेब हुसैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। विशेष लोक अभियोजक (SPP) नवीन कुमार मट्टा और वकील मो. फैज़ान अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 21 अगस्त को शिकोहपुर भूमि सौदे में DLF की भूमिका से जुड़ी चल रही जांच पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें कहा गया कि जांच पूरी करने के लिए उन्हें कुछ और समय चाहिए। इससे पहले भी ED ने उन दस्तावेजों की सूची देने के लिए 3 सप्ताह का समय मांगा था, जिनका इस्तेमाल जांच में नहीं किया गया है, क्योंकि जांच अभी लंबित थी।
ED का आरोप है कि आरोपी कंपनियों के बीच एक फर्जी सेल डीड (बिक्री विलेख) तैयार की गई, जिसमें लेन-देन की रकम के बारे में गलत जानकारी दी गई थी। मुख्य शेयरहोल्डर होने के नाते, आरोपी व्यक्ति ही इस कथित अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का मुख्य लाभार्थी था। यह भी आरोप है कि आरोपी कंपनी और DLF के बीच हुए एक जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट के जरिए 58 करोड़ रुपये की 'अपराध से प्राप्त कमाई' (PoC) हुई, और आरोप है कि इस रकम को आरोपी रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ी कंपनियों के जरिए घुमाया गया और इस्तेमाल किया गया। पुलिस की FIR के आधार पर, ED ने 21.12.2018 को अपना मामला दर्ज किया और कथित आपराधिक गतिविधियों से हुई कमाई का पता लगाने के लिए जांच शुरू की। बताया गया है कि 01.09.2018 को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित खेड़की दौला पुलिस स्टेशन में रॉबर्ट वाड्रा, भूपिंदर सिंह हुड्डा, DLF कंपनी, M/s ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (M/s OPPL) और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। यह मामला IPC की धाराओं 120-B, 420, 467, 471 और 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988' (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की धारा 13 के तहत दर्ज किया गया था। बाद में, 16.01.2025 को इस FIR में IPC की धारा 423 भी जोड़ दी गई।