12 सांसदों के निलंबन पर विवाद, सरकार ने माफी मांगने को कहा, विपक्ष का इंकार

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 07, 2021

नयी दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन 12 सदस्यों को पूरे सत्र के लिए निलंबित करने पर राज्यसभा में जारी गतिरोध दूसरे सप्ताह मंगलवार को भी बना रहा और सत्ता पक्ष एवं विपक्ष अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे। सरकार ने मंगलवार को उच्च सदन में कहा कि यदि निलंबित सदस्यों ने माफी नहीं मांगी तो उसे शोरगुल में विधेयक पारित कराने को मजबूर होना पड़ेगा वहीं विपक्ष ने माफी मांगने से साफ इंकार करते हुए कहा कि इन 12 सदस्यों का निलंबन सरकार को वापस लेना चाहिए। दो बार के स्थगन के बाद उच्च सदन की बैठक जब अपराह्न तीन बजे शुरू हुई तो संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, ‘‘हम सरकार की तरफ से कहना चाहते हैं कि हम शोरगुल में विधेयक पारित नहीं करना चाहते। मैं आपके (आसन) माध्यम से अनुरोध करता हूं कि वे (निलंबित विपक्षी सदस्य) माफी मांगें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो कुछ हुआ है, उसे पूरे देश ने देखा है। (एक विपक्षी सदस्य) टेबल पर नाचा है।

खड़गे ने आरोप लगाया, ‘‘राज्यसभा में जो गतिरोध पैदा हो रहा है, उसके लिए सरकार जिम्मेदार है। हमने बहुत कोशिश की है कि सदन चले। हमने सदन के नेता (पीयूष गोयल) और सभापति (वेंकैया नायडू) से बार-बार यही कहा कि आप नियम के तहत ही निलंबित कर सकते हैं, लेकिन आपने नियम को छोड़ दिया और मानसून सत्र की घटनाओं के लिए हमारे 12 सदस्यों को गलत तरीके से निलंबित किया।’’ उनके मुताबिक, निलंबित करने से पहले सदस्यों को नामित किया जाना चाहिए। इसके बाद प्रस्ताव आता और फिर निलंबन होना चाहिए। यह भी उसी दिन यानी 11 अगस्त, 2021 को होना चाहिए था। खड़गे ने दावा किया, ‘‘विपक्षी सदस्यों को अलोकतांत्रिक तरीके से निलंबित किया गया है। हम बार बार सभापति से निवेदन कर रहे हैं कि हमारे सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना आपका फर्ज है। क्या वह सरकार के दबाव में हैं, यह हमें मालूम नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस सत्र में हम बहुत मुद्दे उठाने चाहते थे। इससे पहले हमने 12 सदस्यों का निलंबन रद्द करने का आग्रह किया। लेकिन सरकार नहीं मानी। ऐसा लगता है कि सरकार की मंशा चर्चा करने की नहीं है।’’

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘हमारी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। मोदी जी तानाशाही तरीके से सदन और सरकार चलाना चाहते हैं।’’ द्रमुक के तिरुची शिवा ने कहा, ‘‘हम शुरू से कह रहे हैं कि निलंबन का फैसला अलोकतांत्रिक है और नियमों के मुताबिक नहीं है। इसलिए हम इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं।’’ उन्होंने यह भी कहा कि सरकार एक तरह से यह आरोप लगाना चाहती है कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है, जबकि ऐसा नहीं है। लोकसभा में सभी दल चर्चा में शामिल हैं। राज्यसभा में सदस्यों के अधिकारों और संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए लड़ रहे हैं। सिर्फ निलंबन रद्द करने से ही सदन चल सकता है। पिछले सप्ताह सोमवार, 29 नवंबर को आरंभ हुए संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को इस सत्र की शेष अवधि के लिए उच्च सदन से निलंबित कर दिया गया था। जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं।

प्रमुख खबरें

Sri Lanka Test से पहले Team India को बड़ा झटका, चोट के कारण Sai Sudharsan भी बाहर

Nag Panchami 2026: कब है नाग पंचमी? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व, कथा, मंत्र और पूजा विधि

Women Reservation Bill पर बोले DK Shivakumar- Kiren Rijiju को कांग्रेस की चिंता करने की ज़रूरत नहीं

उद्धव ठाकरे का केंद्र पर तीखा हमला: पुलिस कार्रवाई की Jallianwala Bagh से की तुलना, PM Modi और HM Shah से मांगे जवाब