देश पर संकट की हर घड़ी में संघ के कार्यकर्ता देवदूत की भाँति सेवा में लग जाते हैं

By ललित गर्ग | Mar 31, 2020

कोरोना ऐसा संकट है, जिसने भारत के लोगों को संकट में डाल दिया है। इस महासंकट से निजात पाने में दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियां धराशायी हो गईं या स्वयं को निरुपाय महसूस कर रही हैं, ऐसे समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं उसके स्वयंसेवक अपनी सुनियोजित तैयारियों, संकल्प एवं सेवा-प्रकल्पों के जरिये कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जरूरतमंदों की सहायता के लिये मैदान में हैं, ‘नर सेवा नारायण सेवा’ के मंत्र पर चलते हुए देश के 529 जिलों में 30 लाख से अधिक स्वयंसेवक हर स्तर पर राहत पहुंचाने में जुटे हैं। सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी के प्रभावी नेतृत्व में देश के अलग-अलग हिस्सों में वे गरीब और जरूरतमंदों को भोजन खिला रहे हैं, बस्तियों में जाकर मास्क, सेनेटाइजर, दवाइयां एवं अन्य जरूरी सामग्री बांटकर कर लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं, जागरूक कर रहे हैं। वे इस आपदा-विपदा में किसी देवदूत की भांति सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। उनके लिए खुद से बड़ा समाज है। उनकी संवेदनशीलता एवं सेवा-भावना की विरोधी भी प्रशंसा करने से स्वयं को रोक नहीं पा रहे हैं। यह ऐसी उम्मीद की किरण है जिससे आती रोशनी इस महासंकट से लड़ लेने एवं उसे जीत लेने की संभावनाओं को उजागर कर रही है।

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भी संभावना भरा नजारा दिखाई दे रहा है। जब सारा देश अपने घरों में कैद होने को मजबूर है। वायरस जानलेवा है, ऐसे में जहां शहर के शहर लॉकडाउन हो गए हैं। चारों तरफ आवागमन बंद हुआ पड़ा है। ऐसी स्थिति में भी संघ के स्वयंसेवक बिना अपनी जान की परवाह किए देश के अलग-अलग हिस्सों में जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने में जुटे हुए हैं। जब संकट बड़ा हो तो संघर्ष भी बड़ा अपेक्षित होता है। इस संघर्ष में संघ कार्यकर्ताओं की मुट्ठियां तन जाने का अर्थ है कि किसी लक्ष्य को हासिल करने का पूरा विश्वास जागृत हो जाना। अंधेरों के बीच जीवन को नयी दिशा देने एवं संकट से मुक्ति के लिये कांटों की ही नहीं, फूलों की गणना जरूरी होती है। अगर हम कांटे-ही-कांटे देखते रहें तो फूल भी कांटे बन जाते हैं। जबकि उम्मीद की मद्धिम लौ, नाउम्मीदी से कहीं बेहतर है। हकीकत तो यह है कि हंसी और आंसू दोनों अपने ही भीतर हैं। अगर सोच को सकारात्मक बना लें तो जीवन हंसीमय बन जाएगी और संकट को हारना ही होगा।

कोरोना वायरस के चलते सब कुछ बंद है। दुकान, प्रतिष्ठान, फैक्ट्री, व्यापार पर ताला जड़ा हुआ है। ऐसे में रोजमर्रा का काम करने वालों के लिए निश्चित ही समस्या खड़ी हुई है। इस स्थिति में जो लोग रोज कमाकर खाते हैं उनको जीवन-निर्वाह में कोई परेशानी न होने पाए इसके लिए संघ विशेष रूप से जागरूक है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में गोकुलदास धर्मशाला में स्वयंसेवकों ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए मुफ्त में भोजन की व्यवस्था की। तो इसी तरह भीलवाड़ा में भी ऐसा ही कुछ नजारा दिखाई दिया जब राहत कार्यों के साथ गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था करते स्वयंसेवक नजर आए। गांव में स्वच्छता बरकरार रहे इसके लिए कुछ स्वयंसेवकों ने मिलकर गांवों को बाकायदा सेनेटाइज तक किया है, झाडू लेकर सफाई करते दिखाई दिये हैं। केरल में सेवा भारती के स्वयंसेवकों ने पुलिस और अग्निशमन दल के साथ मिलकर अस्पतालों के परिसर की सफाई की और उन्हें कीटाणुरहित बनाने में सहयोग किया। कोथमंगलम, कोडुंगल्लूर और राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्वयंसेवक साफ-सफाई और स्वच्छता में लगे हुए हैं।

सरकार्यवाह श्री भैयाजी जोशी ने स्वयंसेवकों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय प्रशासन के साथ जुटने का आहृवान किया था और एक लाख से अधिक सेवा प्रकल्प प्रारंभ किये। उन्होंने कहा था कि स्वयंसेवक छोटी-छोटी टीमें बनाकर समाज में सहायता, स्वच्छता, स्वास्थ्य, जागरूकता लाने के लिए कार्य करें। इस आहृवान के बाद से देश के अलग-अलग हिस्सों में संघ के स्वयंसेवक सेवा कार्य में जुट गए हैं। कोरोना वायरस के कारण भारतीय जनजीवन में अनेक छेद हो रहे हैं, जिसके कारण अनेक विसंगतियों को जीवन में घुसपैठ करने का मौका मिल रहा है। जोशी ने संकल्प व्यक्त किया कि हमें मात्र उन छेदों को रोकना है, बंद करना है बल्कि जिम्मेदार नागरिक की भांति जागरूक रहना होगा। यदि ऐसा होता है तो एक ऐसी जीवन-संभावना, नाउम्मीदी में उम्मीदी बढ़ सकती है, जो न केवल सुरक्षित जीवन का आश्वासन दे सकेगी, बल्कि कोरोना महासंकट से मुक्ति का रास्ता भी दे सकेगी। प्रयत्न अवश्य परिणाम देता है, जरूरत कदम उठाकर चलने की होती है, विश्वास की शक्ति को जागृत करने की होती है। विश्वास उन शक्तियों में से एक है जो मनुष्य को जीवित रखती है, संकट से पार पाने का आश्वासन बनती है।

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एक तरफ कोरोना के डर से लोग घरों में कैद हैं, तो कुछ लोग इस वायरस को गंभीरता से न लेकर लॉकडाउन के बावजूद भी सड़कों पर दिखाई रहे हैं। वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों, पुलिस प्रशासन के साथ देश के लाखों जिम्मेदार लोग कोरोना को मात देने के लिए घरों से बाहर निकले हुए हैं। संघ के स्वयंसेवक और दायित्ववान कार्यकर्ता अपने घरों से बाहर निकल कर गली-मोहल्लों में घूमकर लोगों को कोरोना के खिलाफ कैसे लड़े, इसके लिए जागरूक कर रहे हैं। कोरोना वायरस महासंकट की अभूतपूर्व त्रासदी से निपटने के लिए संघ ने जिला स्तर पर पावर सेंटर और हेल्पलाइन प्रारंभ की है। इस पूरे महाअभियान की मॉनिटरिंग सरकार्यवाह भैयाजी जोशी खुद कर रहे हैं। उन्होंने सेवा प्रकल्पों का नेटवर्क देश के प्रत्येक जिले और तहसील में मजबूत करने के लिए 30 वर्ष से अधिक समय कठोर परिश्रम और समर्पण के साथ दिया है। वे संघ के गैर राजनीतिक किस्म के ऐसे प्रचारक माने जाते हैं जिनकी दिलचस्पी सामाजिक सेवा-कार्यों में अधिक है। संघ के एक लाख से अधिक सेवा प्रकल्पों को खड़ा करने का श्रेय भैयाजी को जाता है।

संघ भारत की सेवा-संस्कृति एवं संस्कारों जीवंत करने का एक गैर-राजनीतिक आन्दोलन है। सेवा-भावना, उदारता, मानवीयता एवं एकात्मकता संघ की जीवनशैली एवं जीवनमूल्य हैं। संघ के अनुषांगिक संगठन सेवा भारती और सेवा विभाग की कार्य योजना दिनों-दिन गंभीर होती स्थिति के बीच राहत की उम्मीद बनी है। इस कार्य-योजना में कोरोना वायरस से निपटने के लिए जनता की मदद की जा रही है। इनमें स्वेच्छा से लॉक डाउन का पालन करवाना, जिला और स्थानीय प्रशासन की मदद करना, तथा अपने मोहल्ले और बस्ती में जिस भी प्रकार की मदद की आवश्यकता हो वह पूरी तत्परता से करना, शामिल है। सनद रहे 22 मार्च से पूर्व संघ की देश भर में 67 हजार से अधिक शाखाएं नित्य प्रतिदिन लगती थीं। एक शाखा के प्रभाव में 20 से 25 हजार की आबादी आती है। प्रत्येक शाखा के प्रभाव में कम से कम 100 से 150 तक प्रशिक्षित स्वयंसेवक होते हैं। इन स्वयंसेवकों को संकट के समय मदद करने का भी प्रशिक्षण होता है। संघ के अलावा अन्य 36 अनुषांगिक संगठन भी अपने-अपने स्तर पर तय योजना के अनुसार सेवा कार्यों में लगे हैं। कई बस्तियों में 15 दिन के लिए परिवार को कार्यकर्ताओं ने ही गोद ले लिया है। जो विद्यार्थी हॉस्टल अथवा गेस्ट हाउस में फंसे हैं, उनकी व्यवस्था भी स्वयंसेवक कर रहे हैं। किसी परिवार में दवाई की आवश्यकता हो या अस्वस्थता हो तो भी उस समय पूर्ण रूप से उनको हर चिकित्सीय सुविधा प्रदान कराई जा रही है। इस महासंकट एवं आशंकाओं के रेगिस्तान में तड़पते हुए आदमी के परेशानी एवं तकलीफों के घावों पर शीतल बूंदें डालकर उसकी तड़प-शंकाओं को मिटाने का अभिनव उपक्रम संघ कर रहा है। निश्चित ही संघ के प्रयत्नों से भारत में कोरोना का परास्त होना ही होगा।

-ललित गर्ग

 

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