Senator Lidia Thorpe | ऑस्ट्रेलिया में एलिजाबेथ द्वितीय को लेकर मचा बवाल, सिनेटर ने महरानी को कहा- उपनिवेशवादी

By रेनू तिवारी | Aug 02, 2022

विश्व के इतिहास में साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद ये दो शब्द ही दुनिया चला रहे थे। साम्राज्यवाद ताकत का पर्यायवाची था और उपनिवेशवाद कमजोरी का। वक्त बदला दो विश्व युद्ध हो गये और अब लोकतंत्र जैसी व्यव्सथा भी विश्व में कई बड़े देशों ने अपनायी हैं ऐसे में अब साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद शब्द को नकारात्म रूप से देखा जाने लगा हैं। अब एक जबरदस्त हंगामा ऑस्ट्रेलिया में देखने को मिला जब स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर लिडिया थोर्प शपथ ले रही थी तब उन्होंने ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को एक उपनिवेशवादी के रूप में संदर्भित किया। और निर्वाचित सांसद के रूप में पद की शपथ लेते हुए अनिच्छा से निष्ठा की शपथ ली।

96 वर्षीय रानी ऑस्ट्रेलिया की राज्य की प्रमुख हैं  उन्हीं को साक्षी मानकर शपत ली जाती है ऐसे में  थोर्प ने विरोध अपना विरोध प्रकट करते हुए सदम में मुठ्ठी उटाकर रानी का विरोध किया और अनिच्छा ने निष्ठा की शपथ ली। ग्रीन्स सीनेटर थोर्प ने कहा, "मैं संप्रभु, लिडिया थोर्प, पूरी निष्ठा और ईमानदारी से शपथ लेती हूं कि मैं वफादार रहूंगी और मैं महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के उपनिवेश के प्रति सच्ची निष्ठा रखती हूं।"

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इसके बाद चैंबर की अध्यक्ष सू लाइन्स ने उन्हें फटकार लगाई। सू लाइन्स ने कहा, "सीनेटर थोर्प, सीनेटर थोर्प, आपको कार्ड पर छपी शपथ का पाठ करना आवश्यक है।" ग्रीन्स की सीनेटर लिडिया थोर्प को रानी को "उपनिवेशक" के रूप में उपसर्ग करने के बाद सीनेट में अपनी निष्ठा की शपथ फिर से देनी पड़ी। आवश्यकतानुसार प्रतिज्ञा का पाठ करने के बाद, थोर्पे ने एक ट्वीट पोस्ट करते हुए कहा, "संप्रभुता कभी नहीं झुकी।"

 

उपनिवेशवाद का अर्थ है

उपनिवेशवाद का अर्थ है- किसी समृद्ध एवं शक्तिशाली राष्ट्र द्वारा अपने विभिन्न हितों को साधने के लिए किसी निर्बल किंतु प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण राष्ट्र के विभिन्न संसाधनों का शक्ति के बल पर उपभोग करना।  

 

ब्रिटेन का उपनिवेश रहा है  ऑस्ट्रेलिया 

ऑस्ट्रेलिया 100 से अधिक वर्षों तक एक ब्रिटिश उपनिवेश था। इस अवधि के दौरान, हजारों मूल ऑस्ट्रेलियाई मारे गए और समुदायों को थोक में विस्थापित किया गया। देश ने 1901 में वास्तविक स्वतंत्रता प्राप्त की, लेकिन कभी भी एक पूर्ण गणराज्य नहीं बन पाया। कई सर्वेक्षणों से पता चलता है कि अधिकांश ऑस्ट्रेलियाई गणतंत्र होने के पक्ष में हैं, लेकिन इस पर बहुत कम सहमति है कि राज्य के प्रमुख को कैसे चुना जाना चाहिए। इस बात को लेकर विवाद था कि रानी के स्थान पर संसद सदस्य चुने जाएंगे या जनता।

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