रुपए में गिरावट जारी डॉलर के मुकाबले पहली बार 91 के पार, निवेशकों की चिंता बढ़ी

By Ankit Jaiswal | Dec 16, 2025

मंगलवार को रुपये की चाल ने बाजार को चौंका दिया। बता दें कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया इंट्रा-डे कारोबार में पहली बार 91 के स्तर से नीचे फिसल गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव साफ नजर आया।

सुबह करीब 11 बजकर 45 मिनट पर रुपया 91.14 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 36 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। गौरतलब है कि सोमवार को भी रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था, जब इसमें एक ही दिन में 29 पैसे की कमजोरी आई थी।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विरोधाभासी संकेत निवेशकों की धारणा पर असर डाल रहे हैं। एक ओर यह कहा जा रहा है कि साल के अंत तक समझौते का पहला चरण हो सकता है, वहीं दूसरी ओर इसकी समयसीमा और शर्तों को लेकर स्पष्टता नहीं है। इसी अनिश्चित माहौल में डॉलर की मांग बनी हुई है और डॉलर-रुपया जोड़ी में रोजाना खरीदारी देखने को मिल रही है।

इसके अलावा, व्यापार घाटे में हालिया कमी भी रुपये को संभालने में मदद नहीं कर सकी। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली लगातार जारी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को एफआईआई ने शेयर बाजार में करीब 1,468 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

महंगाई के मोर्चे पर भी तस्वीर पूरी तरह राहत देने वाली नहीं है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में थोक महंगाई दर लगातार दूसरे महीने नकारात्मक रही और यह शून्य से नीचे 0.32 प्रतिशत पर दर्ज की गई। हालांकि दालों और सब्जियों जैसे कुछ खाद्य पदार्थों के दाम महीने-दर-महीने बढ़े हैं, लेकिन समग्र रूप से महंगाई का दबाव कमजोर ही बना हुआ है।

वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी जरूर देखी गई, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई और ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा।

घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी का असर दिखा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में रहे, जिससे निवेशकों की सतर्कता और बढ़ गई है। कुल मिलाकर विदेशी पूंजी की निकासी, वैश्विक संकेतों और व्यापार समझौते को लेकर असमंजस के चलते रुपये की स्थिति फिलहाल दबाव में बनी हुई हैं।

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