Russia on India: भारत को फंसाने में लगा यूरोप, बीच में रूस ने ली धांसू एंट्री

By अभिनय आकाश | Nov 18, 2024

सस्ते के चक्कर में कभी कभी महंगा सौदा हो जाता है। रूस ने इस कहावत के जरिए भारत को आगाह किया कि अगर उसने सही समय पर निर्णय नहीं लिया तो ये फैसला आने वाले वक्त में भारत के लिए महंगा साबित हो सकता है। रूस ने साफ साफ भारत को चेतावनी दी कि अमेरिका और पश्चिमी देश भारत के स्वदेशीकरण का अध्ययन कर रहे और अपनी रणनीतियां बना रहे हैं। लेकिन इससे ठीक उलट रूस भारत के साथ सहयोग कर उनके रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में ईमानदारी से मदद करना चाहता है। रूसी थिंक टैंक कॉरनोगी मॉस्को सेंटर के अनुसार अमेरिका और पश्चिमी देश ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) के नाम पर भारत को केवल भ्रमित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना नहीं बल्कि उनका अध्ययन करना है। जिससे वो भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता के खिलाफ जवाबी रणनीतियां बना सके। 

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बात पश्चिमी देशों की करें तो वो तकनीक ट्रांसफर के नाम पर कड़ी शर्तें लगाते हैं। टीओटी केवल दिखावा है। तकनीकी विशेषज्ञता साझा नहीं की जाती है। भारत का उपयोग कर अपने फायदे की रणनीतियां बनाते हैं। लेकिन रूस तकनीकी ट्रांसफर के मामले में उदार रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल जैसी परियोजना भारत और रूस के सहयोग का उदाहरण है। रूस भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तैयार है। खैर, रूस का मानना है कि भारत और रूस के बीच का सहयोग जारी रहना चाहिए। पश्चिमी देशों के साथ तकनीक साझेदारी का कोई ठोस आधार नहीं है। रूस ने ये भी स्पष्ट किया है कि वो भारत के साथ 100 प्रतिशत टीओटी करने के लिए तैयार है। ये भारत के लिए एक सुनहरा अवसर है। 

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