UN में भारत के खिलाफ अमेरिका प्रायोजित प्रस्ताव आता रहा, वीटो लिए समर्थन में खड़ा रूस हर बार इसे गिराता रहा

By अभिनय आकाश | Mar 03, 2022

अंग्रेजी की एक कहावत है "A real friend is one who walks in when the rest of the world walks out" यानी जब सारी दुनिया साथ छोड़ देती है तब एक सच्चा दोस्त आपका साथ देता है। भारत और रूस की वर्षों पुरानी दोस्ती पर ये बात बिल्कुल खरी उतरती है। यूक्रेन में रूस की सेना डटी हुई है। राजधानी कीव से लेकर खारकीव में लगातार हमले कर रही है। कई शहर वीरान हो गए हैं। इस बीच 2 मार्च यानी बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव रखा गया। इसमें कहा गया कि रूस अब यूक्रेन से अपनी सेना हटा ले, वहां भारी तबाही हो रही है। इसमें कुल 191 देशों ने हिस्सा लिया। बता दें कि वोटिंग के दौरान भारत ने अपना रूख कायम रखा। लिहाजा भारत इस वोटिंग से दूर रहा जबकि इस प्रस्ताव के पक्ष में 141 देशों ने वोटिंग की जबकि 35 देशों ने दूरी बनाई रखी। पांच देशों ने प्रस्ताव के विरोध में वोट किया। भारत ने यूएन जनरल असेंबली में अपना रूख साफ कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने यूएनएससी में कहा कि भारत यूक्रेन में बिगड़ते हालात को लेकर बेहद चिंतित है। खार्किव में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी। हम उनके परिवार और इस संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले प्रत्येक नागरिक के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।

जब रूस ने दिया भारत का साथ

इतिहास में ऐसे एक-दो नहीं बल्कि छह मौके आए जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को रूस ने अपने वीटो पावर के सहारे किनारे लगा दिया। रूस ऐसा पहला देश था जिसने कश्मीर पर भारत के पक्ष में वीटो किया था। 1957 में जब कश्मीर पर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पास कराने की कोशिश की तो रूस ने अपने वीटो का इस्तेमाल कर भारत का साथ दिया था। यूएन में ऑस्ट्रेलिया, क्यूबा, यूके और अमेरिका ने एक प्रस्ताव लाया था जिसमें कश्मीर में अस्थायी तौर पर फोर्स तैनात करने की बात कही गई थी। ऑस्ट्रेलिया, क्यूबा, यूके, अमेरिका, चीन इराक, फिलिपींस, कोलंबिया ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया, जबकि स्वीडन ने वोटिंग से बनाई दूरी। भारत के पक्ष में खुलकर खड़ा हुआ रूस और अपने वीटो के जरिये प्रस्ताव पास नहीं होने दिया। 

गोवा के लिए रूस का वीटो

साल 1961 में भी रूस ने 99वें वीटो का इस्तेमाल भी भारत के लिए किया था। इस बार रूस का वीटो गोवा मसले पर भारत के पक्ष में था। फ्रांस, तुर्की, यूके और अमेरिका इस बार भी भारत के खिलाफ प्रस्ताव लेकर आया था। प्रस्ताव में भारत सरकार से फौज हटाकर 1961 के पहले की स्थिति बहाल करने की मांग की गई थी। लेकिन उनके ये मंसूबे रूस के वीटो पावर की वजह से पूरे नहीं हो सके। 

कश्मीर को लेकर प्रस्ताव

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस ने 22 जून 1962 को अपने 100वें वीटो का इस्तेमाल कश्मीर मुद्दे पर भारत के समर्थन में किया था। दरअसल, सुरक्षा परिषद में आयरलैंड ने कश्मीर मसले को लेकर भारत के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसका अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन (सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य) के अलावा आयरलैंड, चिली और वेनेजुएला ने समर्थन किया था।  

भारत पाक युद्धविराम

अमेरिका ने एक बार फिर 1971 के भारत पाक सीमा पर युद्धविराम लागू कराने को लेकर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लेकर आया। चीन, इटली, जापान समेत कई देशों का उसे समर्थन मिला। लेकिन रूस ने अपने वीटो के जरिये प्रस्ताव को गिरा दिया। 

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शर्णार्थियों के मसले पर प्रस्ताव

भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान शरणार्थियों के मसले को लेकर एक बार फिर कई देश संयुक्त राष्ट्र की चौखट पर पहुंचे। अर्जेंटिना, बेल्जियम, बुरुंडी, इटली, जापान, निकारागुआ, सियरा लियोन और सोमालिया ने भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव लाया, जिससे शरणार्थियों की वापसी हो सके। रूस ने पांचवीं बार वीटो पावर के जरिये भारत का समर्थन किया। 

सैन्य वापसी की मांग

अमेरिका की तरफ से एक बार फिर भारत-पाक युद्ध रोकने और सेनाओं को वापस बुलाने के लिए जरूरी कदम उठाने को लेकर प्रस्ताव लाया गया। लेकिन रूस ने एक बार फिर इस पर भी वीटो कर दिया।

- अभिनय आकाश

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