Russia की वॉशिंग मशीन... 50% टैरिफ से 5 दिन पहले अब अमेरिका ने क्या कह दिया?

By अभिनय आकाश | Aug 22, 2025

भारत रूस से तेल खरीदता है। फिर उसे रिफाइन करता है और उसके प्रोडक्ट्स तैयार करता है। उन प्रोडक्ट्स को अमेरिका के बाजार में बेचता है। उससे जो मोटा मुनाफा होता है उसी पैसे से फिर से रूस से तेल खरीदता है। रूस उसी पैसे से हथियार बनाता है और उसे यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल करता है। व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने भारत पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदकर न सिर्फ मुनाफा कमा रहा है बल्कि रूस यूक्रेन युद्ध की जंग को और बढ़ा रहा है। नवारो ने तो रूस के लिए भारत को ऑयल लाड्रोमैट कह दिया। ऑयल मतलब कि तेल और लाड्रोमैट यानी की लॉन्ड्री या सफाई करना। 

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मतलब की अब से कुछ ही दिनों में भारत पर डबल टैरिफ लग जाएगा।  आपको पता ही है कि 30 जुलाई को ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। जिसके बाद 6 अगस्त को ट्रंप ने एक और फैसला लिया था, जिसमें भारत पर 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का ऐलान किया। ये 27 अगस्त से प्रभावी होगा। यानी कुल मिलाकर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया।

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आपको बता दें कि रूस से तेल केवल भारत ही नहीं खरीदता है। बल्कि रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। चीन की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता सीमांत से भी अधिक है, जो कि बेसेन्ट के बयान के विपरीत है। 2024 के दौरान रूस से चीन का कच्चे तेल का आयात 62.59 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। जुलाई 2025 में, चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक था, उसके बाद भारत और तुर्की का स्थान था। एस जयशंकर ने भी रूस से अमेरिका को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले बता देते हैं कि हम रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार नहीं हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार हम नहीं, चीन है। उन्होंने कहा कि हम रूसी एलएनजी के भी सबसे बड़े खरीदार नहीं है, यूरोपीय यूनियन है।

2022 के वह बाद रूस के साथ व्यापार में उछाल वाले देश भी हम नहीं है। वे शायद दक्षिण के कुछ देश हैं। हम अमेरिका से भी तेल खरीद रहे हैं। ट्रंप टैरिफ पर विदेश मंत्री ने ये बातें कहीं। रूस में जयशंकर ने राष्ट्रपति पुतिन और विदेश मंत्री से बात की। जयशंकर ने कहा कि हम तो वो देश हैं जो अमेरिका से भी तेल खरीद रहा है और इसकी मात्रा को भी बढ़ा दिया है। जयशंकर ने कहा कि मैं आपको बता दूं कि अमेरिका ने ही हमसे कहा था कि वैश्विक एनर्जी मार्केट को स्थिर रखने के लिए अगर आपको रूसी तेल खरीदना पड़े तो आप खरीद सकते हैं। लेकिन अब देखिए कि अमेरिका के सुर कैसे बदल गए हैं। एस जयशंकर ने सीधे सवाल का सीधा और सटीक उत्तर दिया।  

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