रूस-यूक्रेन युद्ध ने सैन्य जरूरतों में आत्मनिर्भरता की जरूरत को रेखांकित किया: राजनाथ

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 29, 2022

नयी दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने इस बात को रेखांकित किया है कि सैन्य साजोसामान के मामले में आत्म-निर्भर होना बहुत जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के तालमेल की जरूरत बताई। नौसेना के कमांडरों के सम्मेलन में सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अभियानों में ‘संयुक्त रूप से काम करना’ भविष्य में किसी भी युद्ध में अहम होगा और सैन्य कमानों का पुनर्गठन और थियेटर कमानों की स्थापना भी जरूरी है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में ‘प्रामाणिक और प्रतिक्रियाशील’ मौजूदगी स्थापित की है।

इसे भी पढ़ें: आसमान से बरसती आग के बीच होगी बिजली गुल! कोयले की कमी से उभरा संकट, अस्पतालों- मेट्रो की सेवा को किया जा सकता है बंद

रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वदेश निर्मित पहले विमानवाहक पोत ‘विक्रांत’ का जलावतरण एक और ऐतिहासिक घटनाक्रम होगा। यह पोत अपने तीन समुद्री परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘जी जान से कोशिश करनी होगी ताकि इस पोत को हमारी आजादी के 75वें वर्ष में नौसेना में शामिल किया जा सके। यह ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ में अहम योगदान होगा।’’ रक्षा मंत्री ने कहा कि 41 जहाजों और पनडुब्बियों के ऑर्डर दिये गये हैं जिनमें से 39 भारतीय गोदियों में बनाये जा रहे हैं। सिंह ने कहा, ‘‘नौसेना स्वदेशीकरण में अग्रणी रही है, वहीं हमें अभी तक प्राप्त सफलताओं को थामकर रखना होगा। मेरा वरिष्ठ पदाधिकारियों से अनुरोध है कि अपना ध्यान भविष्य को लेकर क्षमता विकास पर रखें ताकि देश की समुद्री ताकत हमारे आर्थिक हितों के साथ तालमेल करते हुए बढ़े।’’ उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता और समृद्धि सशस्त्र बलों पर निर्भर है। चार दिवसीय नौसेना कमांडर सम्मेलन की शुरुआत सोमवार को हुई।

प्रमुख खबरें

US-Iran के बीच New Deal की पेशकश, क्या प्रतिबंधों के बदले परमाणु कार्यक्रम रोकेगा तेहरान?

Tamil Nadu में सियासी गतिरोध खत्म! Vijay कल ले सकते हैं शपथ, राज्यपाल से मिल सरकार बनाने का दावा किया पेश

BJP पूंजीवाद को देती है बढ़ावा , Akhilesh Yadav का सरकार पर हमला, बोले- जल्द बढ़ेंगे Petrol-Diesel के दाम

इस बार हमारी सरकार (व्यंग्य)