आसमान से बरसती आग के बीच होगी बिजली गुल! कोयले की कमी से उभरा संकट, अस्पतालों- मेट्रो की सेवा को किया जा सकता है बंद

आसमान से बरसती आग के बीच होगी बिजली गुल! कोयले की कमी से उभरा संकट, अस्पतालों- मेट्रो की सेवा को किया जा सकता है बंद
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दिल्ली में जहां गर्मी से 52 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया हैं वहीं ऐसी भीषण गर्मी में बिजली संकट लोगों की परेशानी और बढ़ा देगा। माना जा रहा है बिजली संकट से मेट्रो सेवा भी रोकी जा सकती हैं। अस्पतालों में भी बिजली स्पलाई में दिक्कत होगी। ऐसे में मरीजों की जान को भी खतरा हो सकता है।

एक तरफ गर्मी का कहर दूसरी तरफ दिल्ली सहित कई राज्यों में आ सकता है बिजली संकट। दिल्ली में बिजली संकट के सबसे ज्यादा आसार हैं क्यों बिजली कंपनियों के पास दो-तीन दिल का ही कोयला बचा हैं। रेलवे ने आपालकाल स्थिति को बनाते हुए कोयले की स्पलाई रेलवे के माध्यम से शुरू करने की बात कही हैं। दिल्ली में जहां गर्मी से 52 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया हैं वहीं ऐसी भीषण गर्मी में बिजली संकट लोगों की परेशानी और बढ़ा देगा। माना जा रहा है बिजली संकट से मेट्रो सेवा भी रोकी जा सकती हैं। अस्पतालों में भी बिजली स्पलाई में दिक्कत होगी। ऐसे में मरीजों की जान को भी खतरा हो सकता है। 

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दिल्ली में आ सकता है बिजली संकट 

दिल्ली सरकार ने गुरुवार को मेट्रो और अस्पतालों सहित महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों में संभावित बिजली व्यवधान की चेतावनी दी। कोयले की बढ़ती कमी के चलते यह चेतावनी दी गई है। दिल्ली सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है, दादरी-2 और ऊंचाहार पावर स्टेशनों से बिजली आपूर्ति बाधित होने से दिल्ली मेट्रो और दिल्ली सरकार के अस्पतालों समेत कई जरूरी संस्थानों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति में दिक्कत हो सकती है। 

 

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दिल्ली सरकार ने केंद्र से मांगी मदद 

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने अब केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राष्ट्रीय राजधानी को बिजली प्रदान करने वाले बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। जैन ने कहा कि दिल्ली की 25 से 30 फीसदी बिजली की मांग को फिलहाल इन कोयला संचालित स्टेशनों से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा, सरकार स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों को बिजली की कमी का सामना न करना पड़े।

ब्लैकआउट हो सकती है दिल्ली, मेट्रो सेवा भी होगी बंद?

सत्येंद्र जैन ने कहा "ये बिजली स्टेशन दिल्ली के कई हिस्सों में ब्लैकआउट को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और गर्मियों में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन, अस्पतालों और घरों में बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं।" दिल्ली सरकार को डर इस बात से आता है कि नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) के दादरी-II और झज्जर (अरावली) में कोयले का भंडार बहुत कम चल रहा है. ये स्टेशन मुख्य रूप से दिल्ली में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थापित किए गए थे। दिल्ली को दादरी-द्वितीय, ऊंचाहार, कहलगांव, फरक्का और झज्जर बिजली संयंत्रों से 1,751 मेगावाट (मेगावाट) बिजली मिलती है। राजधानी को सबसे ज्यादा 728 मेगावाट की आपूर्ति दादरी-II पावर स्टेशन से होती है, जबकि 100 मेगावाट ऊंचाहार स्टेशन से।

कोयले की कमी के कारण आया बिजली संकट

कोयले की कमी, उत्तर और पूर्व में लंबे समय तक लू चलने के कारण देश के कई हिस्सों में बिजली गुल हो गई है। अब कई राज्य बिजली की रिकॉर्ड मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस बीच, केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वे इन्वेंट्री बनाने के लिए अगले तीन वर्षों में अपने आयात को बढ़ावा दें। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने कहा कि पूरे भारत में थर्मल पावर प्लांट कोयले की कमी से जूझ रहे हैं, जो देश में बिजली संकट का संकेत है।





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