Haridwar में Biryani पर संतों का ऐतराज: 'देवभूमि' की पवित्रता बनाए रखने को 'वेज पुलाव' नाम की मांग

By अंकित सिंह | Jun 06, 2026

हरिद्वार के अखंड परशुराम अखाड़ा के संतों ने एक अभियान शुरू किया है जिसमें भोजनालयों से अपने साइनबोर्ड और मेनू से 'बिरयानी' शब्द हटाने का आग्रह किया गया है। उनका प्रस्ताव है कि पवित्र शहर की धार्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए 'वेज बिरयानी' का नाम बदलकर 'वेज पुलाव' कर दिया जाए। संतों ने हरिद्वार भर में विभिन्न खाद्य विक्रेताओं का दौरा किया और दावा किया कि चूंकि 'बिरयानी' पारंपरिक रूप से मांसाहारी भोजन से जुड़ी है, इसलिए इस पवित्र धार्मिक स्थल पर इसका उपयोग अनुचित है और इससे स्थानीय निवासियों और आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं।

भगवताचार्य पंडित पवन शास्त्री ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हरिद्वार विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगर है और इसकी संस्कृति स्वाभाविक रूप से सात्विक (शुद्ध/शाकाहारी) है। बिरयानी शब्द का नाम सुनते ही मांसाहारी भोजन का ख्याल आता है, जो इस देवभूमि की गरिमा के विरुद्ध है। हमने सभी दुकानदारों से अनुरोध किया है कि वे अपने मेनू और साइनबोर्ड पर बिरयानी शब्द के स्थान पर 'वेज पुलाव' लिखें। इससे उनके व्यवसाय पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न ही सनातनी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। यदि कोई इसके बाद भी बिरयानी शब्द का प्रयोग करता रहेगा, तो हम उसके खिलाफ औपचारिक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

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अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि हरिद्वार एक पवित्र तीर्थ स्थल है। हमने देखा है कि कई स्टॉल 'वेज बिरयानी' के नाम से भोजन बेच रहे हैं। चूंकि 'बिरयानी' शब्द ही मांसाहारी व्यंजनों से जुड़ा है, इसलिए इस पवित्र भूमि के लिए यह शब्द उपयुक्त नहीं है। हमने दुकानदारों से 'बिरयानी' शब्द हटाने और इसके बजाय 'वेज पुलाव' बेचने की अपील की है। हमारा उद्देश्य शहर की पवित्रता और धार्मिक वातावरण को बनाए रखना है। हम सभी विक्रेताओं से अनुरोध करते हैं कि वे इस अनुरोध में सहयोग करें ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद न हो।

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