Salman Khan मानहानि मामला, अदालत ने Abhinav Kashyap पर लगाई रोक, कहा- "अभिव्यक्ति की आजादी अपशब्द कहने का लाइसेंस नहीं"

By रेनू तिवारी | Feb 01, 2026

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान और उनके परिवार के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियां करना फिल्म निर्माता अभिविन कश्यप को भारी पड़ गया है। मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने शुक्रवार को कश्यप को सलमान खान, उनके पिता सलीम खान और भाइयों (अरबाज व सोहेल खान) के खिलाफ किसी भी प्रकार की अपमानजनक सामग्री प्रकाशित करने या बयान देने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।

अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति के खिलाफ अपशब्द और धमकी भरी का इस्तेमाल कर सकता है। न्यायाधीश पी. जी. भोसले ने अभिनेता द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई करते हुए कश्यप और दो अन्य के खिलाफ एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश पारित किया।

कश्यप और कई अन्य लोगों के खिलाफ दीवानी अदालत में दायर मुकदमे में स्थायी निषेधाज्ञा और नौ करोड़ रुपये के हर्जाने का अनुरोध किया गया है। सितंबर और दिसंबर 2025 के बीच जारी किये गये 26 वीडियो साक्षात्कारों और पॉडकास्ट की एक श्रृंखला के मद्देनजर खान ने कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। मुकदमे में दावा किया गया है कि कश्यप ने इन वीडियो में खान और उनके परिवार के खिलाफ ‘‘अपमानजनक, झूठे और मानहानिकारक’’ बयान दिए हैं।

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कश्यप के अलावा, खुशबू हजारे और प्रमुख सोशल मीडिया मंच को भी मुकदमे में नामजद किया गया है। मुकदमे के अनुसार, ‘‘बॉलीवुड ठिकाना’’ चैनल पर प्रसारित इन वीडियो में खान की पेशेवर ईमानदारी और व्यक्तिगत चरित्र के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों को निशाना बनाने वाली ‘अपमानजनक’ टिप्पणियां शामिल हैं। मुकदमे में उन बातों का भी उल्लेख किया गया है जहां कश्यप ने खान की शक्ल-सूरत, उम्र और निजी जीवन का वर्णन करने के लिए आपत्तिजनक का इस्तेमाल किया और कथित तौर पर उनकी तुलना कुख्यात अपराधियों से की। याचिका में दावा किया गया है कि अभिनेता के पिता सलीम खान और भाई अरबाज खान और सोहेल खान के खिलाफ विशेष रूप से अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।

अधिवक्ता प्रदीप गांधी के माध्यम से दायर मुकदमे में प्रतिवादियों को भविष्य में किसी भी प्रकार की मानहानिकारक सामग्री या साक्षात्कार प्रकाशित करने से स्थायी रूप से रोकने का अनुरोध किया गया है। इसमें प्रतिवादियों और सोशल मीडिया मंचों को सभी विवादित सामग्री को तुरंत हटाने और बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश देने की भी अपील की गई। खान ने तत्काल अंतरिम राहत के लिए भी अदालत का रुख किया। पॉडकास्ट पर दिए गए साक्षात्कार में कश्यप के बयानों का अध्ययन करने के बाद, न्यायालय ने पाया कि ये ‘‘प्रथमदृष्टया मानहानिकारक, अपमानजनक और आपत्तिजनक’’ हैं।

अदालत ने कहा कि इन बयानों से आम जनता की नजर में वादी की छवि धूमिल होती है। इसने कहा कि प्रतिवादियों द्वारा वादी (सलमान) की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ‘‘कोई भी किसी के परिवार के खिलाफ मानहानिकारक बयान नहीं दे सकता और न ही किसी को ऐसा करना चाहिए’’। अदालत ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी निजता और छवि की रक्षा करने का अधिकार है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘‘बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति किसी के खिलाफ अपमानजनक और धमकी भरी का प्रयोग कर सकता है’’।

अदालत ने कश्यप और अन्य लोगों को अस्थायी रूप से किसी भी प्रकार की मानहानिकारक/अपमानजनक सामग्री बनाने, वीडियो अपलोड करने, पोस्ट करने, पुनः पोस्ट करने, साक्षात्कार देने, पत्राचार करने, संवाद करने, अपलोड करने, प्रिंट करने, प्रकाशित करने, पुनः प्रकाशित करने, प्रसारित करने या पुनः प्रसारित करने से रोक दिया।

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