By एकता | Nov 08, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाबलों के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने एक बार फिर 'दिमागी नक्सल' वाला बयान दोहराया। पीएम के इस बयान पर समाजवादी पार्टी ने तीखा पलटवार किया है और केंद्र सरकार की नीतियों पर सीधे सवाल खड़े किए हैं।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने पीएम मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "जब से बीजेपी की सरकार बनी है, तब से संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। चुनाव आयोग, सीबीआई और ईडी जैसी जांच एजेंसियों की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आज नौजवान और विपक्ष मिलकर लोकतंत्र को बचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र और आम जनता के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वालों के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है और हक की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर में जवानों के बीच दिवाली मनाते हुए कहा कि यह पहली बार है जब देश का हर जिला नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हुआ है। इसी दौरान उन्होंने 'दिमागी नक्सल' का जिक्र करते हुए कहा, "जंगलों से हथियारी नक्सली तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सली बच्चों को गुमराह कर रहे हैं। इन लोगों ने नई पीढ़ी के दिमागों में घुसपैठ कर ली है।"
पीएम मोदी ने 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले 15 अगस्त 2026 को लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के भाषण में किया था, जिस पर विपक्ष ने काफी ऐतराज जताया था। इसके बाद 5 सितंबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के 100वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में भी उन्होंने यही बात कही थी। अब बस्तर में जवानों के बीच तीसरी बार यह बयान आने के बाद एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है।