IIMC महानिदेशक संजय द्विवेदी बोले- डिजिटल दुनिया में भी कायम है प्रिंट मीडिया का महत्व

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 10, 2022

इंदौर। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी का कहना है कि डिजिटल और सोशल मीडिया के सक्रिय हो जाने के बावजूद प्रिंट मीडिया का अलग महत्व है। हमारे सामने भले ही चुनौतियां हैं, लेकिन हम अपनी चुनौतियों का डटकर मुकाबला करते आ रहे हैं। यही कारण है कि आज भी अखबार की साख और इसकी विश्वसनीयता बरकरार है। प्रो. द्विवेदी वीणा संवाद केंद्र, इंदौर द्वारा मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के शिवाजी सभागार में आयोजित विशेष व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार श्री कृष्ण कुमार अष्ठाना ने की एवं विषय प्रवर्तन प्रतिष्ठित पत्रिका 'वीणा' के संपादक श्री राकेश शर्मा ने किया। 

आईआईएमसी के महानिदेशक के अनुसार अखबार अपने आप में विशिष्टता पैदा करें। अखबार को अब अपना व्यक्तित्व विकसित करना होगा। उन्हें खास दिखना होगा। उसको किसे संबोधित करना है, इसका विचार करना होगा। उन्हें एक समर्पित संस्था की तरह काम करना होगा। अब वे सिर्फ खबर देकर मुक्त नहीं हो सकते, उन्हें अपने सरोकारों को स्थापित करने के लिए आगे आना होगा। अब अखबार का मुख्य उत्पाद खबर नहीं है। उसका सरोकार, उसकी विश्लेषण शक्ति, उसकी खबरों के पीछे छिपे अर्थों को बताने की क्षमता और व्याख्या की शैली उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 

प्रो. द्विवेदी ने कहा आज अखबार को स्थानीय जनों से एक रिश्ता बनाना पड़ेगा, जिसके मूल में खबर नहीं, स्थानीय सामाजिक सरोकार होंगे। सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव ही किसी अखबार की स्वीकार्यता में सहायक होगा। शायद इसीलिए अब अखबार इवेंट्स और अभियानों का सहारा लेकर लोगों के बीच अपनी पैठ बना रहे हैं। इससे ब्रांड वैल्यू के साथ स्थानीय सरोकार भी स्थापित होते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विमर्शों के मंच बनकर ही अखबार अपनी साख बना और बचा सकते हैं। अखबार विचारों को थोपने के बजाए, विमर्श के मंच की तरह काम करें। समाचार और विचार पक्ष अलग-अलग हैं और उन्हें अलग ही रखा जाए। हमें खबरों में विचारों की मिलावट से बचने के प्रयास करने होंगे। 

प्रो. द्विवेदी के अनुसार अखबारों ने एक लंबे अरसे से ये मान लिया है कि उनका काम सिर्फ संकटों की तरफ उंगली उठाना है। लेकिन संकट का समाधान ढूंढना और लोगों को न्याय दिलाना भी अखबार की जिम्मेदारी है। एक संस्था के रूप में अखबार बहुत ताकतवर हैं। इसलिए उन्हें सामान्यजनों की आवाज बनकर उनके संकटों के समाधान के प्रकल्प के रूप में सामने आना चाहिए। वे सहयोग के लिए हाथ बढ़ाएं और एक ऐसा वातावरण बनाएं, जहां अखबार सामाजिक उत्तरदायित्वों का वाहक नजर आए। 

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इस अवसर पर उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी, मप्र के निदेशक श्री जयंत भिसे, श्री वीडी ज्ञानी, वरिष्ठ साहित्यकार श्री सूर्यकांत नागर, श्री हरेराम बाजपेयी, श्री सदाशिव कौतुक, श्री प्रदीप नवीन, प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी, प्रो. पुष्पेंद्र दुबे, श्री अरविंद ओझा, श्री मुकेश तिवारी, श्रीमती कविता वर्मा, डाॅ. अर्पण जैन, श्रीमती प्रीति दुबे, श्री नारायण भाई जोशी, श्री केएल जोशी, श्री लक्ष्मीकांत पंडित, श्री श्याम बैरागी, श्रीमती वाणी जोशी,श्री मुकेश तिवारी, श्री सोहन दीक्षित सहित अनेक लेखक एवं पत्रकार मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अंतरा कर्वदे ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वसुधा गाडगिल ने दिया।

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