CJI पर टिप्पणी मामला: SCBA की अवमानना याचिका पर Sanjay Raut को Supreme Court में पेशी का आदेश

By अभिनय आकाश | Oct 28, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (28 अक्टूबर) को शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत को निर्देश दिया कि वे अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही के सिलसिले में व्यक्तिगत रूप से पेश हों। यह कार्यवाही उनके उन सोशल मीडिया बयानों को लेकर शुरू की गई है, जो उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), जस्टिस सूर्यकांत और न्यायपालिका के खिलाफ दिए थे।

इसे भी पढ़ें: भीमाशंकर अभयारण्य के पास 32,490 पेड़ काटने का आदेश, Sanjay Raut ने उठाए सवाल

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने पत्रकार निखिल वागले को भी निर्देश दिया है कि वे उसी तारीख को कार्यवाही के दौरान वर्चुअली (ऑनलाइन) उपस्थित रहें। वागले के खिलाफ भी अवमानना ​​का नोटिस जारी किया गया है।

शीर्ष अदालत ने उन्हें 17 नवंबर को दोपहर 2 बजे पेश होने के लिए कहा है।

बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि यह मामला पूरी संस्था से जुड़ा एक अहम मुद्दा है।

16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राउत और वागले को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया था, लेकिन अगली सुनवाई में उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी थी। अदालत ने कहा था कि वह पहले उनके जवाबों पर विचार करेगी। 

इसे भी पढ़ें: Manoj Jarange का दावा: 500 करोड़ रुपये की ऑडियो क्लिप असली, फर्जी बताने की हो रही कोशिश
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा अवमानना ​​याचिका दायर


सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा दायर एक अवमानना ​​याचिका पर 'कारण बताओ' नोटिस जारी किए गए। SCBA के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने आरोप लगाया कि राउत और वागले की टिप्पणियां निष्पक्ष आलोचना की सीमा से बाहर थीं और इनसे सुप्रीम कोर्ट में जनता का भरोसा कम हो सकता है। न्यायपालिका को निशाना बनाने वाले बयानों पर चिंता जताते हुए, CJI ने कहा कि अदालतों ने हमेशा व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का समर्थन किया है, इसलिए इस संस्था पर हमले होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। SCBA ने दोनों प्रतिवादियों की व्यक्तिगत उपस्थिति की मांग की थी। हालांकि, पीठ ने पहले 'कारण बताओ' नोटिस जारी करने का फैसला किया। पीठ ने कहा, "हम अभी 'कारण बताओ' नोटिस दे रहे हैं। बेशक, हम व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे रहे हैं। देखते हैं क्या होता है। इससे पहले, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971' (न्यायालय अवमानना ​​अधिनियम, 1971) की धारा 15(1)(b) के तहत आपराधिक अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने की सहमति दे दी थी। SCBA ने 15 अक्टूबर को अपनी याचिका दायर की थी, और उसी दिन वेंकटरमणी ने इसके लिए सहमति दे दी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब CJI ने विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल की व्यक्तिगत मुलाकात की मांग को ठुकरा दिया और कहा कि इस मामले को याचिका के जरिए अदालत के सामने लाया जा सकता है। SCBA की याचिका के अनुसार, इसके बाद वागले ने अपने X (ट्विटर) अकाउंट पर CJI के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट की।

प्रमुख खबरें

धार्मिक प्रतीक वाले गैर-हिंदुओं की Agamic मंदिर में नो एंट्री, High Court ने सुनाया फैसला

Allahabad High Court का GDA को आदेश: Gulmohar Greens के अवैध टावर ढहाएं, लापरवाह अफसर सस्पेंड

पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क मामले में Andhra Pradesh Police ने बिहार से दो आरोपियों को दबोचा

US Donkey Route: भारतीयों से 60 लाख रुपये तक वसूली, ED ने खोला अवैध रास्तों का जाल