By अनन्या मिश्रा | Oct 31, 2026
आज ही के दिन यानी की 31 अक्टूबर को देश के पहले गृहमंत्री लौह पुरुष' के नाम से मशहूर सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म हुआ था। वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्र भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। आज भी यह हमारे राष्ट्र की नींव है। उन्होंने 562 रियासतों को जोड़कर देश के एकता के सूत्र में बांधा था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
इसके बाद उनको वकालत करने का लाइसेंस मिल गया था। फिर साल 1910 में वह अपने बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल की मदद करने और करियर में आगे बढ़ने के लिए इंग्लैंड चले गए। लंदन में उन्होंने 'मिडल टेम्पल' में एडमिशन लिया। इस दौरान उन्होंने 36 महीना का कोर्स सिर्फ 30 महीने में किया। वह फर्स्ट क्लास के साथ पास हुए। साल 1913 में वह भारत लौटे और अहमदाबाद में वकालत करने लगे।
वल्लभभाई पटेल ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। वह गांधी जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। उन्होंने नमक सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी। पटेल के दृढ़ नेतृत्व और संगठनात्मक कौशल ने उनको भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक प्रमुख स्थान दिलाया। उनके नेतृत्व में बारडोली सत्याग्रह और खेड़ा सत्याग्रह जैसे आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए अहम माने जाते हैं। बारडोली सत्याग्रह में किसानों पर लगान बढ़ने के विरोध में आंदोलन के सफल नेतृत्व की वजह से पटेल को 'सरदार' की उपाधि मिली।
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देश की आजादी के बाद करीब 500 से ज्यादा रजवाड़े, जोकि स्वतंत्र रूप से अपने क्षेत्र पर राज कर रहे थे। देश के गृहमंत्री होने के नाते यह जिम्मेदारी निभाते हुए सरदार पटेल ने भारतीय यूनियन में शामिल किया। वह भी बिना किसी तरह की हिंस का सहारा लिए हुए। सरदार वल्लभभाई पटेल की सराहनीय इच्छाशक्ति और भारत को एकजुट करने के दृढञ संकल्प की वजह से उनको 'भारत का लौह पुरुष' कहा जाता है।
सरदार पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री बन सकते थे। लेकिन गांधीजी के निर्देश पर सरदार पटेल ने पीएम पद की दावेदारी से अपना नाम वापस ले लिया और पंडित नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे। उनका जीवन सादगी भरा था। बताया जाता था कि उनके पास खुद का नाम तक नहीं था, वह अहमदाबाद में एक किराए के मकान में रहते थे।
वहीं 15 दिसंबर 1950 को सरदार वल्लभभाई पटेल का निधन हो गया था। निधन के बाद उनको साल 1991 में देश के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।