By अभिनय आकाश | Apr 03, 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सनक भरी हरकतें इस युद्ध में उन्हें लगातार अकेला कर रही हैं। ट्रंप के बड़बोले बयान से ही दुनिया के सबसे ताकतवर सैन्य अलायंस नाटो के टूटने की आशंका पैदा हो गई है। इसी तरह लंबे समय तक अमेरिका का करीबी सहयोगी रहने वाला सऊदी अरब भी अब उनसे किनारा करता दिख रहा है। खुद अमेरिका के लोग भी अब ट्रंप के फैसलों पर सवाल उठाने लगे हैं। यह जंग अब सिर्फ मिसाइलें और सैन्य कार्यवाही तक नहीं रह गई। बल्कि इस जंग की वजह से कूटनीति भी तेजी से करवट ले रही है। इस बदलती नीति का ताजा उदाहरण सऊदी अरब है। ध्यान रहे सऊदी अरब लंबे समय तक अमेरिका का करीबी रहा है। कहना चाहिए सहयोगी तो अब भी है लेकिन ट्रंप के बड़बोलेपन से सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को ऐसे हर्ट किया कि उन्होंने अमेरिका के प्रतिद्वंदी रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से फोन कॉल पर बात की। इस फोन कॉल ने वैश्विक राजनीति में नए संकेत दे दिए हैं।
जाहिर है सऊदी अरब और रूस के बीच हुई बातचीत महज एक फोन कॉल नहीं बल्कि सऊदी अरब की बदलती विदेश नीति का संकेत भी है। सऊदी अरब अब संतुलन की रणनीति अपनाता दिख रहा है। वह एक तरफ अमेरिका से रिश्ते बनाए रखना चाहता है। लेकिन दूसरी तरफ वह रूस और चीन जैसे वैश्विक ताकतों के साथ भी अपने संबंध मजबूत कर रहा है। ट्रंप ने जो सऊदी अरब पर दबाव में होने का बड़बोला दावा किया था तो उसके प्रिंस ने दिखा दिया कि सऊदी अरब किसी के दबाव में नहीं है बल्कि वह एक धड़े पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगा।