प्रवासी श्रमिकों के मामले में केंद्र और राज्यों को 15 दिन का वक्त देने का विचार कर रहा न्यायालय

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 05, 2020

नयी दिल्ली।उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह रास्ते में फंसे हुये प्रवासी कामगारों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाने के लिये केन्द्र और राज्यों को 15 दिन का वक्त देने की सोच रहा है। न्यायालय ने कहा कि इन कामगारों के पंजीकरण और रोजगार के अवसरों सहित सारे मसले पर नौ जून को आदेश सुनायेगा। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने पलायन कर रहे प्रवासी कामगारों की दयनीय स्थिति का स्वत: संज्ञान लिये गये मामले की वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई की। 

इस बीच, केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि इन प्रवासी श्रमिकों को उनके पैतृक स्थान तक पहुंचाने के लिये तीन जून तक 4,200 से अधिक ‘विशेष श्रमिक ट्रेन’ चलाई गयीं हैं। मेहता ने कहा कि अभी तक एक करोड़ से ज्यादा श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया है और अधिकांश ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार में खत्म हुयी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें बता सकती है कि अभी और कितने प्रवासी कामगारों को स्थानांतरित करने की आवश्यकता है और इसके लिये कितनी रेलगाड़ियों की जरूरत होगी। 

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सालिसीटर जनरल ने पीठ को भरोसा दिलाया कि संबंधित राज्यों को आवश्यक रेलगाड़ियां उपलब्ध करायी जा रही हैं और भविष्य में भी अगर मांग की गयी तो उन्हें मुहैया कराया जायेगा। शीर्ष अदालत ने 28 मई को निर्देश दिया था कि अपने पैतृक स्थान जाने के इच्छुक सभी प्रवासी कामगारों से ट्रेन या बसों का किराया नहीं लिया जाये। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया था कि रास्ते में फंसे श्रमिकों को संबंधित प्राधिकारी नि:शुल्क भोजन और पानी मुहैया करायेंगे।

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