By Ankit Jaiswal | Jun 26, 2026
एशिया के शेयर बाजारों में शुक्रवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई हैं। पिछले कुछ महीनों से एआई क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में लगातार तेजी देखने को मिल रही थी, लेकिन अब बढ़े हुए मूल्यांकन और लागत को लेकर निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा हैं। यही वजह रही कि अधिकांश प्रमुख बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिली हैं।
गौरतलब है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र का व्यापक सूचकांक भी लगभग 3.8 प्रतिशत गिर गया, जो एक वर्ष से अधिक समय की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही हैं। इससे पहले इसी तिमाही में इन बाजारों में शानदार तेजी देखने को मिली थी।
बता दें कि इस गिरावट की शुरुआत अमेरिका से हुई, जहां प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली दर्ज की गई। विशेष रूप से एप्पल के शेयरों में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जिससे कंपनी के बाजार मूल्य में करीब 250 अरब डॉलर की कमी आ गई हैं। कंपनी ने मेमोरी चिप और स्टोरेज उपकरणों की बढ़ती लागत के कारण अपने कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है, जिसके बाद निवेशकों ने चिंता जताई कि अब बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव बढ़ सकता हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई से जुड़ी परियोजनाओं पर लगातार बढ़ता निवेश, चिप निर्माण की ऊंची लागत और पूंजीगत खर्च में वृद्धि अब कंपनियों की आय को प्रभावित कर सकती हैं। इसी कारण निवेशक अब केवल मजबूत आधार वाली कंपनियों में ही निवेश करना पसंद कर रहे हैं।
एशिया में एआई और दूरसंचार से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला हैं। चीन का कृत्रिम बुद्धिमत्ता सूचकांक लगभग 5 प्रतिशत और पांचवीं पीढ़ी संचार सूचकांक 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया। प्रकाशीय उपकरण बनाने वाली प्रमुख कंपनी झोंगजी इनोलाइट के शेयरों में भी करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई हैं। वहीं हांगकांग का प्रौद्योगिकी सूचकांक भी कई महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ता दिखाई दिया।
मौजूद जानकारी के अनुसार तिमाही समाप्त होने से पहले कई निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की, जिससे बिकवाली और तेज हो गई हैं। हालांकि भारी गिरावट के बावजूद दक्षिण कोरिया का कोस्पी इस तिमाही में अब भी करीब 62 प्रतिशत और जापान का निक्केई लगभग 34 प्रतिशत की बढ़त पर बना हुआ हैं।
इस बीच अमेरिकी वायदा बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। ऐसी खबरें सामने आईं कि एआई क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ओपनएआई अपनी बहुप्रतीक्षित सार्वजनिक हिस्सेदारी योजना को अगले वर्ष तक टाल सकती है। इससे पूरे एआई क्षेत्र के मूल्यांकन को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही, लेकिन इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर नहीं दिखा हैं। साथ ही जापानी मुद्रा येन भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कई दशकों के निचले स्तर के आसपास बनी हुई है, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह गिरावट एआई क्षेत्र के अंत का संकेत नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही तेज बढ़त के बाद बाजार में स्वाभाविक सुधार का दौर माना जा रहा हैं। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, वैश्विक आर्थिक संकेत और चिप उद्योग की लागत बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।