By नीरज कुमार दुबे | Feb 09, 2026
सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉक्टर पैट्रिक अर्मिनी की भारत यात्रा ऐसे समय हुई है जब हिंद महासागर विश्व राजनीति का नया रणक्षेत्र बनता जा रहा है। इस पृष्ठभूमि में नई दिल्ली ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ रिश्तों को केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें सामरिक, आर्थिक और तकनीकी ताकत में बदलेगी। यही कारण है कि इस यात्रा ने भारत सेशेल्स संबंधों को एक नए चरण में पहुंचा दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति अर्मिनी की मौजूदगी में दोनों देशों ने कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये। सबसे बड़ी घोषणा रही सेशेल्स के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर की विशेष आर्थिक सहायता योजना। यह सहायता सामाजिक आवास, विद्युत गतिशीलता, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य, रक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसी ठोस परियोजनाओं पर खर्च होगी। साफ है कि भारत केवल वादे नहीं, जमीन पर दिखने वाले काम चाहता है।
प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि विकास साझेदारी ही दोनों देशों के संबंधों की मजबूत नींव है और भारत के सभी प्रयास सेशेल्स की जरूरतों पर आधारित हैं। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने, वित्त तकनीक और डिजिटल समाधान पर साथ काम करने तथा डिजिटल रूपांतरण में भारत के अनुभव को साझा करने पर सहमति बनी। इससे शासन, सेवा वितरण और पारदर्शिता में तेजी आने की उम्मीद है।
सेशेल्स के सरकारी अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए भी समझौता हुआ है। भारत का क्षमता निर्माण कार्यक्रम पहले से ही सेशेल्स के मानव संसाधन को मजबूत करता रहा है। अब इसे और गति दी जाएगी ताकि युवाओं को कौशल और रोजगार के अवसर मिलें। स्वास्थ्य क्षेत्र में सस्ती और अच्छी दवाओं की आपूर्ति, चिकित्सीय पर्यटन और स्वास्थ्य ढांचे के विकास पर जोर रहेगा।
साथ ही ऊर्जा और जलवायु के क्षेत्र में दोनों देश मिलकर तेजी से काम करेंगे। साफ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाएगा, जलवायु बदलाव से निपटने के उपाय खोजे जाएंगे और ऐसी अवसंरचना बनाई जाएगी जो आपदाओं को झेल सके। स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन और बिजली से चलने वाले वाहनों पर भी जोर रहेगा। साथ ही पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति और खेल के माध्यम से दोनों देशों के लोगों को और करीब लाने की कोशिश होगी, खास तौर पर युवाओं के आदान प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके अलावा, समुद्री पड़ोसी होने की वजह से समुद्र आधारित अर्थव्यवस्था दोनों देशों के सहयोग का स्वाभाविक क्षेत्र है। समुद्री अनुसंधान, प्रशिक्षण और जानकारी साझा करने में भारत सेशेल्स की मदद करेगा। रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा इस रिश्ते की रीढ़ हैं। सेशेल्स को कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन का पूर्ण सदस्य बनाए जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे हिंद महासागर में शांति और स्थिरता मजबूत होगी। इसके अलावा, दोनों देशों ने एक संयुक्त दृष्टि पत्र जारी करने का निर्णय लिया जो आने वाले वर्षों के लिए सहयोग का मार्गदर्शक होगा। राष्ट्रपति अर्मिनी ने सेशेल्स की आजादी के पचास वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री को मुख्य अतिथि बनने का निमंत्रण दिया। साथ ही यह वही वर्ष है जब दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के भी पचास वर्ष पूरे हो रहे हैं।
हम आपको बता दें कि अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अर्मिनी ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने चेन्नई और मुंबई में स्वास्थ्य, बंदरगाह, जहाजरानी, निवेश और समुद्री उद्योग से जुड़े पक्षों से बातचीत भी की थी। यह यात्रा अक्टूबर 2025 में पद संभालने के बाद उनकी पहली भारत यात्रा है, इसलिए इसका प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों तरह का महत्व है।
द्विपक्षीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि हिंद महासागर की लहरें सदियों से दोनों देशों के लोगों को जोड़ती रही हैं। व्यापार बढ़ा, संस्कृतियां मिलीं और विश्वास की परंपरा मजबूत हुई। सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय ने वहां के सामाजिक और आर्थिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान दिया है और पीढ़ी दर पीढ़ी मित्रता को मजबूत किया है।
हम आपको बता दें कि सामरिक नजरिये से सेशेल्स का महत्व बहुत बड़ा है। यह उन समुद्री मार्गों के पास स्थित है जो एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ते हैं। भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का बड़ा हिस्सा इन्हीं मार्गों से गुजरता है। सेशेल्स के साथ मजबूत संबंध भारत को समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और बाहरी ताकतों के बढ़ते प्रभाव पर नजर रखने में मदद देते हैं। यह पूर्वी अफ्रीका और द्वीपीय देशों की ओर भारत का प्राकृतिक सेतु भी है। इस तरह सेशेल्स भारत की हिंद महासागर नीति का एक सामरिक स्तंभ बनकर उभर रहा है।
देखा जाये तो सेशेल्स के राष्ट्रपति की भारत यात्रा समुद्री राजनीति का स्पष्ट संदेश है। हिंद महासागर में जो देश अपनी मौजूदगी मजबूत करेगा, वही आने वाले समय में व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा के खेल में बढ़त लेगा। भारत ने समझ लिया है कि खाली बयान नहीं, निवेश, प्रशिक्षण, तकनीक और सुरक्षा सहयोग ही असली असर पैदा करते हैं। सवाल यह नहीं कि सेशेल्स छोटा देश है या बड़ा, सवाल यह है कि वह कहां स्थित है और किसके साथ खड़ा है। जो ताकतें हिंद महासागर में अपना जाल फैलाना चाहती हैं, उनके लिए यह संकेत है कि भारत अपने पड़ोस को अकेला नहीं छोड़ेगा। विकास और सुरक्षा को साथ लेकर चलने वाली यह नीति भारत को भरोसेमंद साथी बनाती है।
बहरहाल, अब चुनौती यह है कि घोषित योजनाएं तेजी से जमीन पर उतरें। यदि भारत ने गति और निरंतरता बनाए रखी, तो सेशेल्स जैसे साझेदार केवल मित्र नहीं रहेंगे, बल्कि हिंद महासागर में भारत की सामरिक ढाल बनेंगे।