Astrology Tips: कुंडली के इन भावों विराजमान शनिदेव बना सकते हैं मालामाल, पद-प्रतिष्ठा में होगी वृद्धि

By अनन्या मिश्रा | Mar 26, 2025

शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है और यह ग्रहों में सबसे धीमी चाल चलने वाला ग्रह है। इस वजह से ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह का विशेष महत्व होता है। शनिदेव को न्याय और कर्मफलदाता कहा जाता है। शनि देव व्यक्ति को उसके द्वारा किए गए कर्मों के हिसाब से शुभ और अशुभ फल देते हैं। एक राशि में शनि देव करीब ढाईं साल तक रहते हैं। इस तरह के शनि को एक राशिचक्र को पूरा करने में ढाईं वर्ष का समय लग जाता है। वहीं जब किसी भी राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या लगती है, तो व्यक्ति का जीवन उथल-पुथल हो जाता है। लेकिन शनिदेव हमेशा अशुभ फल नहीं देते हैं। कुंडली में कुछ ऐसे भाव भी होते हैं, जहां पर विराजमान होकर शनि देव शुभ फल देते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि शनि देव कब और किन भावों में शुभ फल प्रदान करते हैं।


कुंडली के लाभ भाव में शनि

कुंडली में कुल 12 भाव होते हैं, जिनका अपना-अपना महत्व होता है। वहीं कुंडली के 11वें भाव को लाभ स्थान कहा जाता है। इस भाव से व्यक्ति की आय और इच्छापूर्ति का विचार किया जाता है। ऐसे में लाभ भाव में शनि का होना शुभ माना जाता है और जब कुंडली के 11वें भाव में शनिदेव विराजमान होते हैं। तो व्यक्ति को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफलता मिलती है। 11वें भाव में शनि जातक की आय को बढ़ाने का काम करते हैं। इस भाव में शनि होने से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलती है और जातक सही रास्ते पर चलकर अपने हर इच्छा को पूरा करता है।

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कुंडली के दशम भाव में शनि

कुंडली के दशम भाव में शनि के होने से जातक के करियर, पद-प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में वृद्धि होती है। यह भाव केंद्र का भाव होता है और इसको काफी शुभ स्थान माना जाता है। ऐसा व्यक्ति अपने क्षेत्र में नेतृत्व करने की क्षमता रखता है, इसके साथ ही वह साहस के साथ बड़ी सफलताएं पाता है। इन जातकों के अपने उच्चाधिकारियों से संबंध मजबूत होते हैं और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है। 


कुंडली के सप्तम भाव में शनि

कुंडली के सप्तम भाव को एक महत्वपूर्ण भाव माना जाता है। कुंडली के 7वें घर में शनि का होना शुभ माना जाता है। इस भाव में शनि के होने से वैवाहिक जीवन में खुशियां और स्थिरता आती है। यह जातक व्यापार में खूब लाभ प्राप्त करता है और साझेदारी में भी लाभ उठाता है। इन जातकों को अपने भाग्य का भरपूर साथ मिलता है।


कुंडली के चतुर्थ भाव में शनि

बता दें कि कुंडली के चौथे भाव से वाहन, संपत्ति, सुख और माता का विचार किया जाता है। कुंडली का यह भाव केंद्र में होता है और यह शुभ स्थानों में गिना जाता है। वहीं जब शनि ग्रह कुंडली के चौथे भाव में विराजमान होते हैं, तो जातक को हर तरह की सुख-सुविधाएं मिलती हैं। शनि के चौथे भाव में होने से जातक स्थाई संपत्ति का मालिक होता है और अपने जीवन में खूब तरक्की करता है। चौथे भाव में शनिदेव के होने से जातक को भाग्य का भरपूर साथ मिलता है, जिसकी वजह से व्यक्ति को धन, नौकरी, विवाह और संतान का सुख हासिल होता है। चौथे भाव में शनि के होने से व्यक्ति गुणी भी होता है।

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