By दिव्यांशी भदौरिया | Oct 19, 2026
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। प्रत्येक माह में पूर्णिमा का पर्व को मनाया जाता है। आश्विन मास के आखिर में शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इसको कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस शुभ अवसर पर धन की देवी मां लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना करने से साधक को जीवन में धन की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
क्या है शरद पूर्णिमा की रात जागरण का धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं। ऐसे में इस रात जो भक्त जागकर देवी का जागरण करते हैं, उन्हें मां लक्ष्मी सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही साधक को जीवन में कभी भी धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, सिर्फ शरद पूर्णिमा की रात को ही चंद्रमा अपनी पूरी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। इस अमृत वर्षा में जागरण करने से साधक का मन शांत रहता है और मानसकि तनाव की समस्या दूर होती है। इसके साथ ही सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
इसके अतिरिक्त, भगवत पुराण में भी लिखा हुआ है कि भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात को ही वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसलिए शरद पूर्णिमा की रात को भजन-कीर्तन करना अधिक फलदायी साबित होगा।
कब है शरद पूर्णिमा? (Sharad Purnima 2026 Date)
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत - 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर
पूर्णिमा तिथि का समापन - 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 41 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।