By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 22, 2020
मुंबई। शिवसेना ने मंगलवार को पूछा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारा जाने और गुरुतेग बहादुर से प्रेरणा लेने की अपील से किसानों के प्रदर्शन का क्या नतीजा निकलेगा, जिसमें उनके अनुयायी शामिल हैं। शिवसेना के मुखपत्र सामना के मराठी संस्करण में एक संपादकीय में मोदी के रविवार को गुरुद्वारा जाने और गुरु तेग बहादुर को उनके सर्वोच्च बलिदान के लिये श्रद्धांजलि अर्पित करने का जिक्र किया गया है। गुरु तेग बहादुर की रविवार को पुण्यतिथि थी।गुरुद्वारा रकाबगंज में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। सिखों समेत हजारों किसान मोदी सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ 26 सितंबर से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसमें लिखा है कि पवित्र धार्मिक ग्रंथ को कितनी भी बार पढ़ लीजिये अगर इससे आपको सीख नहीं मिलती, तो इसका कोई फायदा नहीं है। साथ ही यह भी सवाल किया गया है कि अगर किसी का समय आ गया है और उसे अपने कर्मों का हिसाब-किताब देना पड़े तो वह क्या करेगा। संपादकीय में कहा गया है कि गुरबाणी में बताया गया है कि समय के आगे किसी का जोर नहीं चल सकता।