प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मरने वाले लोगों का आंकड़ा छुपा रही शिवराज सरकार, 1 लाख से अधिक लोगों की हुई मौत- जीतू पटवारी

By दिनेश शुक्ल | May 04, 2021

भोपाल। मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार झूठ पर झूठ बोले जा रही है, मुख्यमंत्री जी यह बताए कि पिछले एक साल से कोरोना महामारी में जनता जी रही है पिछले दो माह से कोरोना संक्रमण से भयावह स्थिति है क्या प्रदेश में कोई ऐसा अस्पताल है जहाँ हर सुविधा उपलब्ध हो। यह कहना है मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष, मीडिया प्रभारी व पूर्व मंत्री जीतू पटवारी का। पटवारी ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री की चापलूसी में व्यस्त है, अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए प्रधानमंत्री की हां में हां मिला रहे है और यहाँ प्रदेश की जनता मर रही है। हमें डरता हुआ मुख्यमंत्री नहीं लड़ता हुआ मुख्यमंत्री चाहिए। 

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पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में सारी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जिन्हें जतना ढूढ़ रही है उनका अतापता नहीं है, जीतू पटवारी ने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को ढूढ़कर लाने वाले को वह 11 हजार का इनाम देंगे। जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि जीवन रक्षक रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति को लेकर सरकार बड़े- बड़े दावे कर रही है, लेकिन यह न तो मरीज को मिल रही है और न ही अस्पताल को, यह बीजेपी नेताओं और विधायकों के घर जा रही है। जहाँ से राशन की तरह इसका वितरण किया जा रहा है। यही कारण है कि इसकी काला बाजारी हो रही है। जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस श्रेय लेने की राजनीति नहीं करती और इस न ही इस मुश्किल समय में श्रेय लेने की राजनीति करना चाहिए जबकि भाजपा नेता श्रेय की राजनीति करने में व्यस्त है। जबकि इंदौर में कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला हो ग्वालियर में विधायक प्रवीण पाठक हो, जबलपुर में माननीय राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा हो, भोपाल में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा व आरिफ मसूद हो, सांसद नकुल नाथ हो सभी कमल नाथ जी के नेतृत्व में कोरोना पीड़ितों की सहायता में निस्वार्थता से लगे है।  

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जीतू पटवारी ने कहा कि हर दिन सरकार के अधिकृत प्रवक्ता डॉ. नरोत्तम मिश्रा विपक्ष पर आरोप लगाते दिख जाएगें लेकिन वह इस महामारी के दौर में आरोप प्रत्यारोप की राजनीति कर सरकार के पापों को छुपा नहीं सकते। एक मोटे अनुमान के अनुसार मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले में अब तक 3 हजार से अधिक मौतें हो चुकी है। ऑक्सीजन की कमी, दवाई एवं जीवन रक्षक इंजेक्शन, सांस फूला चुके अस्पताल और पैरामेडिकल स्टॉफ और डॉक्टरों की कमी के चलते असमय हजारों लोग अपने प्राण गवा चुके है। जिला स्तर पर मौत के इन आंकड़ों की भयावह स्तिथि की तुलना करें तो पूरे प्रदेश में 01 लाख से जायदा मौतें हो चुकी है। सरकार की नाक के नीचे यानी राजधानी भोपाल में सामने आया है कि अप्रैल महीने में 2500 से ज्यादा लोगों का कोविड की वजह से अंतिम संस्कार किया गया, जबकि सरकार का आधिकारिक आंकड़ा सिर्फ 109 ही है। भोपाल में कोरोना से मृत्यु का सही आंकड़ा पता करने के लिए कई मीडिया संस्थानों ने तीन श्मशान गृहों और एक कब्रिस्तान के रिकॉर्ड्स खंगाले। इससे पता चला है कि पिछले महीने 2,567 बॉडीज कोविड प्रोटोकॉल के तहत या तो जलाई गईं या फिर दफनाई गई। वहीं, चार जगहों पर 1273 लोगों का अंतिम संस्कार गैर-कोविड प्रोटोकॉल के तहत किया गया।

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जीतू पटवारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल हो या प्रदेश की दमोह विधानसभा सीट यहाँ जनता ने बिके हुए लोगों को नाकार दिया है। लोकतंत्र की हत्या करने वालों को जनता पसंद नहीं कर रही जहाँ भी जनमत के खिलाफ आलोकतांत्रिक तरीके से बीजेपी ने सत्ता हथियाने की कोशिश की है वहाँ जनता ने इन चुनावों में उसे करारा जबाब दिया है। प्रदेश के दमोह उप चुनाव में जनता ने बिके हुए व्यक्ति को नाकार दिया है अब बीजेपी को इस बात को समझ लेना चाहिए। जीतू पटवारी ने कहा कि कोरोना महामारी के काल में कांग्रेस पार्टी हमेशा सरकार के साथ खड़ी है, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बिना मांगे ही मुख्यमंत्री को कई सुझाव दिए है लेकिन भाजपा सरकार का यह फर्ज बनता था कि वह विपक्ष से भी सुझाव लेती सर्वदलीय बैठक में कोविड से लड़ने के लिए चर्चा करती लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी तो झूठ का पुलिंदा है वह न्यूज चैनलों पर यह कहते तो है कि हमने सभी दलों से सुझाव लिए है लेकिन आज तक ऐसा हुआ नहीं है। लेकिन इसके बावजूद भी हम सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पूरे प्रदेश को कोरोना माहमारी की इस भयावह स्तिथि से निकालने के लिए तत्पर है। 

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जीतू पटवारी ने शिवराज सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि अधिमान्य पत्रकारों के साथ ही गैर अधिमान्य पत्रकारों को भी कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स की श्रेणी में जोड़ा जाए, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ का मनोबल बढाया जाए, कोरोना मरीज जिनकी ऑक्सीजन के अभाव में मृत्यु हुई है उन्हें 4 लाख रूपए का मुआबजा दिया जाए और जिम्मेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए, बिजली के बिल, लोन की ईएमआई, स्कूलों की फीस सरकार माँफ करे और कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉक डाउन की वजह से घर बैठे लोगों को हर माह 7 हजार रूपए सहायता राशि दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को कोरोना संक्रमण की भयावह स्थिति को देखते हुए अब ग्रामीण स्तर पर भी कोविड केयर सेंटर बनाना चाहिए और झूठे आंकड़े पेश करने से बचना चाहिए। 

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