By अंकित सिंह | Oct 06, 2026
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को भारत के चुनाव आयोग (ECI) की ओर विपक्ष के मार्च पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष के नेताओं पर आरोप लगाया कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया पर बार-बार सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं को 'बदनाम' करने की कोशिश कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि अगर विपक्ष का अब यह मानना है कि मौजूदा सिस्टम के तहत हुए चुनावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और झारखंड में उनकी चुनावी जीत भी 'गैर-कानूनी' थी।
केंद्रीय मंत्री ने वोटर लिस्ट में सुधार करने की ECI की कवायद का भी बचाव किया और पूछा कि मरने वाले लोगों, गैर-नागरिकों या एक से ज़्यादा जगहों पर रजिस्टर्ड लोगों के नाम वोटर लिस्ट में क्यों रहने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि फ़र्ज़ी वोट रोकने के लिए चुनाव व्यवस्था में लगातार सुधार हुए हैं। EVM ने बूथ लूट पर लगाम लगाई, और फ़ोटो वोटर आईडी व सूची की जाँच ने फ़र्ज़ी मतदाताओं पर रोका। S.I.R. भी सुधार की इसी कड़ी का हिस्सा है। मृत, डुप्लिकेट और जगह छोड़ चुके नाम सूची से हटें। जब सूची ही साफ़ नहीं होगी, तो साफ़ चुनाव कैसे होगा?
चौहान ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सही वोटर लिस्ट बहुत ज़रूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार सवाल उठाने से चुनावी सिस्टम के प्रति लोगों का भरोसा कम हो सकता है और अस्थिरता पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा, "देश को अस्थिरता और अराजकता में धकेलने का पाप न करें। देश और यहां के लोग इसे कभी माफ नहीं करेंगे।" हालांकि, विपक्ष का कहना है कि उनकी चिंताएं सिर्फ़ अपनी चुनावी हार को लेकर नहीं हैं, बल्कि वोटर लिस्ट की निष्पक्षता और पारदर्शिता तथा ECI के कामकाज को लेकर हैं। सुधार का रास्ता आगे जाता है, पीछे नहीं। जनादेश का सम्मान कीजिए, सुधार का विरोध नहीं।