शुक्र प्रदोष व्रत करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की होती है प्राप्ति

By प्रज्ञा पाण्डेय | Oct 11, 2019

शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष कहा जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है। तो आइए हम आपको शुक्र प्रदोष व्रत के बारे में कुछ खास जानकारी देते हैं। 

 

शुक्र प्रदोष व्रत के फायदे

शुक्र प्रदोष व्रत करने से शिव जी की कृपा बनी रहती है। इस व्रत से जीवन में किसी प्रकार का अभाव नहीं रहता है और रोगों पर होने वाले खर्चों में कमी आती है। साथ ही दाम्पत्य जीवन में आने वाला क्लेश दूर हो जाता है और डायबिटीज में भी आराम मिलता है। 

 

व्रत में बरतें सावधानी

शुक्र प्रदोष व्रत में कुछ सावधानियां बरतें। इसके लिए सबसे पहले अपने घर पर आई हुई सभी स्त्रियों को मिठाई खिलाएं और जल पिलाएं। साथ में घर और घर के मंदिर में साफ-सफाई का जरूर ध्यान रखें। शंकर जी पूजा में काले गहरे रंग के कपड़े न पहनें। व्रत के दौरान मन में दुष्विचार ना आने दें। अपने गुरु और पिता के साथ अच्छा व्यवहार करें। 

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शुक्र प्रदोष व्रत से जुड़ी कथा

प्राचीन काल में एक नगर में राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और धनिक पुत्र तीन मित्र रहते थे। इन मित्रों में राजकुमार, ब्राह्मण कुमार अविवाहित थे लेकिन धनिक पुत्र का विवाह हो गया था लेकिन गौना बाकी था। तीनों मित्र एक दिन बात कर रहे थे कि स्त्रियों के घर विरान होता है और उसमें भूत निवास करते हैं। उसके बाद धनिक पुत्र अपने ससुराल गया और विदाई की जिद करने लगा। इस पर उसके ससुराल वालों ने कहा कि अभी शुक्र देव डूबे हैं, अभी विदाई करना ठीक नहीं है। लेकिन धनिक पुत्र नहीं माना और अपनी पत्नी विदा कर ले आया। 

 

रास्ते में बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और दोनों पति-पत्नी गिर गए उन्हें चोट लग गयी। उसके बाद उन्हें रास्ते में डाकू मिले जो सारा धन लूटकर ले गए। इसके बाद भी परेशानी कम नहीं हुई घर पहुंच कर धनिक पुत्र को सांप ने काट लिया और वैद्य ने कहा कि यह केवल तीन दिन तक जीवित रहेगा। तब धनिक पुत्र के घर वाले उसके मित्र ब्राह्मण कुमार को बुलाए। ब्राह्मण कुमार ने धनिक के मां-बाप को शुक्र प्रदोष का व्रत करने की सलाह दी और धनिक को उसकी पत्नी के साथ ससुराल भेज दिया। इस प्रकार शुक्र व्रत के प्रभाव से धनिक पुत्र की समस्याएं कम हो गयीं और वह धीरे-धीरे ठीक हो गया। 

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शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 10 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 52 मिनट से होगा। यह मुहूर्त 11 अक्टूबर को रात 10 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। शुक्र प्रदोष व्रत में पूजा का मुहूर्त 11 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 56 मिनट से रात 08 बजकर 25 मिनट तक है। इस मुहूर्त में ही भगवान शिव की उपासना करना भक्तों हेतु फलदायी होगा।  

 

कैसे करें शुक्र प्रदोष व्रत 

शुक्र प्रदोष के दिन सुबह उठकर स्नान कर हल्के रंग के सफेद या गुलाबी रंग वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे में जल के साथ चीनी मिलाएं और अघर्य दें। भगवान शिव के मन्त्र ॐ नमः शिवाय का जाप करें। भगवान शिव को पंचामृत (दूध दही घी शहद और शक्कर) से स्नान कराएं। उसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर रोली, मौली और चावल धूप दीप से पूजा करें। साबुत चावल की खीर बनाएं और फल शंकर जी को चढ़ाएं। वहीं आसन पर बैठकर  नमः शिवाय मन्त्र 108 बार जपें।

 

प्रज्ञा पाण्डेय

 

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