Equity Mutual Funds में निवेश 15% गिरा, पर SIP Investment का बढ़ा क्रेज, AMFI ने जारी किए ताजा आंकड़े

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 11, 2026

मूल्यांकन से जुड़ी चिंता और सीमित रिटर्न के बीच निवेशकों के सावधानी बरतने से जुलाई में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश मासिक आधार पर 15 प्रतिशत घटकर 24,697 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि, व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) के जरिये निवेश से समर्थन मिलना जारी रहा। म्यूचुअल फंड उद्योग के संगठन एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की तरफ से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी केंद्रित योजनाओं में जुलाई लगातार 65वां महीना रहा, जब शुद्ध निवेश आया। इक्विटी योजनाओं में निवेश जून के 28,973 करोड़ रुपये और पिछले साल जुलाई के 42,702 करोड़ रुपये की तुलना में काफी कम रहा।

लार्जकैप फंड में 1,322 करोड़ रुपये आए। संपत्ति प्रबंधन फर्म इक्विरस वेल्थ के प्रबंध निदेशक अंकुर पुंज ने कहा, ‘‘इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश में कमी निवेशकों का इक्विटी से भरोसा उठने के बजाय कुछ हद तक अधिक चयनात्मक रुख को दर्शाती है।’’ मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कारोबार अधिकारी अखिल चतुर्वेदी ने कहा कि इक्विटी-केंद्रित म्यूचुअल फंड के प्रति निवेशकों का सतर्क रुख पिछले दो वर्षों में अपेक्षाकृत कम रिटर्न की वजह से भी रहा। समूचे म्यूचुअल फंड उद्योग में जुलाई के दौरान स्थिति बदली और करीब 2.36 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जबकि जून में 52,949 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई थी।

इस बदलाव की अगुवाई ऋण आधारित फंड योजनाओं ने की, जिनमें जुलाई में करीब 1.88 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया जबकि जून में 1.09 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। लिक्विड फंड में सबसे अधिक 1,19,066 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इसके बाद ओवरनाइट फंड में 40,413 करोड़ रुपये और मनी मार्केट फंड में 21,180 करोड़ रुपये आए। ग्रो म्यूचुअल फंड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वरुण गुप्ता ने कहा, ‘‘ऋण योजनाओं में निवेश में तेज बदलाव लिक्विड, ओवरनाइट और मनी मार्केट फंड में मजबूत निवेश से आया।

इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अपने ऋण पोर्टफोलियो में तरलता और लचीलेपन को प्राथमिकता दे रहे हैं।’’ म्यूचुअल फंड उद्योग की प्रबंधन-अधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) जुलाई के अंत में मासिक आधार पर 4.3 प्रतिशत बढ़कर 85.76 लाख करोड़ रुपये हो गईं। जून के अंत में यह 82.22 लाख करोड़ रुपये थीं। एम्फी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वेंकट चलासानी ने कहा कि जुलाई में उद्योग की एयूएम वृद्धि मुख्य रूप से बाजार मूल्य में बढ़ोतरी और घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की लगातार खरीदारी से हुई।

गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में भी जुलाई के दौरान 1,559 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो जून के 3,443 करोड़ रुपये के आधे से भी कम था। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया में शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि निवेश में कमी सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद मुनाफावसूली और साल की पहली छमाही में मजबूत निवेश का परिणाम हो सकती है।

प्रमुख खबरें

West Bengal Voter List से नाम हटाने पर Supreme Court सख्त, ECI से मांगा SIR Tribunals का डिस्पोजल डेटा

FCRA संशोधन बिल JPC को भेजेगी सरकार? विपक्ष के विरोध के बीच बड़ा संकेत

Nano EV फिर से बनेगी India की शान! एक बयान और अटकलों का दौर

Pakistan Crisis: इमरान खान को रिहा करो वरना भुगतने होंगे नतीजे, PTI की बड़ी चेतावनी, होगा देशव्यापी आंदोलन