Bhai Dooj पर भाई की दीर्घायु के लिए किया गया बहन का व्रत अवश्य फलीभूत होता है

By शुभा दुबे | Nov 14, 2023

भैया दूज पर्व को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। रक्षाबंधन के दिन जहां भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन लेते हैं वहीं भैया दूज के दिन बहनें भगवान से अपने भाई की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। मान्यता है कि इस दिन जो बहन अपने भाई का तिलक करने तक श्रद्धा से व्रत रखती है उसका भाई अवश्य लंबी आयु को प्राप्त करता है। साथ ही यह त्योहार भाई बहन के बीच प्यार और स्नेह की भावना को और प्रगाढ़ करता है। भैया दूज का उत्सव पूरे भारत भर में धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि इस पर्व को मनाने की विधि हर जगह एक जैसी नहीं है। उत्तर भारत में जहां यह चलन है कि इस दिन बहनें भाई को अक्षत व तिलक लगाकर नारियल देती हैं वहीं पूर्वी भारत में बहनें शंखनाद के बाद भाई को तिलक लगाती हैं और भेंट स्वरूप कुछ उपहार देती हैं।

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भैय्या दूज व्रत कथा

भगवान सूर्यदेव की पत्नी का नाम छाया है। उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ। यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती हैं। वह उनसे बराबर निवेदन करतीं कि वह उनके घर आकर भोजन करें, लेकिन यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण यमुना की बात टाल जाते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन करने के लिए बुलाया। बहन के घर जाते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया।

भाई को देखते ही यमुना ने हर्ष−विभोर होकर भाई का स्वागत सत्कार किया तथा भोजन करवाया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर मांगने को कहा। बहन ने भाई से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आया करेंगे तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाये, उसे आपका भय न रहे। यमराज तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमपुरी चले गये। ऐसी मान्यता है कि जो भाई आज के दिन यमुना में स्नान करके पूरी श्रद्धा से बहनों के आतिथ्य को स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता।

-शुभा दुबे

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