By दिव्यांशी भदौरिया | Apr 21, 2026
हिंदू धर्म में व्रत-त्योहार का विशेष महत्व माना जाता है। स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान मुरुगन यानी कार्तिकेय जी को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी मनाई जाती है। इस बार 22 अप्रैल यानी कल स्कंद षष्ठी मनाई जाएगी। स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान शिव और मात पार्वती के बड़े पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है।
स्कंद षष्ठी 2026 पूजा विधि
- स्कंद षष्ठी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना के साथ व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद ही एक साफ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान कार्तिकेय की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- भगवान कार्तिकेय के साथ ही शिव-पार्वती का पूजन भी करना बेहद जरुरी है।
- पूजन के दौरान भगवान कार्तिकेय को पंचामृत और जल से स्नान कराएं और इन्हें चंदन, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
- शास्त्रों के अनुसार, कार्तिकेय जी को नीले फूल और मोरपंख अत्यंत प्रिय है, इसलिए इन्हें पूजा में जरुर शामिल करें।
- इसके बाद धूप-दीप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- पूजन के दौरान ॐ स्कन्दाय नमः या ॐ शरवणभवाय नमः का जाप करें।
- पूजा के आखिरी में कथा सुनें और आरती करें।
स्कंद षष्ठी व्रत के नियम
इस दिन मन,वचन और कर्म से शुद्ध रहना जरुरी माना गया है। इसलिए इस दिन तामसिक भोजन जैसे कि लहसुन, प्याज, मांस) और नशीली वस्तुओं का सेवन न करें। व्रत के दिन किसी भी प्रकार के विवाद, क्रोध या किसी की निंदा न करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन जमीन पर सोना शुभ होता है। इसके साथ ही जरुरतमंदों को फल, वस्त्र व अनाज दान करें।
संतान सुख के लिए उपाय
अगर आप संतान प्राप्ति करना चाहते हैं, तो स्कंद षष्ठी का व्रत बेहद खास है। इस दिन व्रत-पूजन के साथ ही विशेष उपाय करने से जल्द ही संतान सुख का योग बनता है। ऐसे में अगर आप भी संतान सुख की कामना कर रहे हैं, तो इस दिन शाम के समय घर की दक्षिण दिशा में शुद्ध घी का एक दीपक जरुर जलाएं। माना जाता है कि ऐसा करने संतान सुख की प्राप्ति होती है।